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हिमाचल हाईकोर्ट के तीन अहम फैसले—सड़क हादसा, सेवा बहाली और क्षेत्राधिकार पर स्पष्टता

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हिमाचल हाईकोर्ट के तीन अहम फैसले—सड़क हादसा, सेवा बहाली और क्षेत्राधिकार पर स्पष्टता

🚗 गलत दिशा में वाहन चलाना लापरवाही, चालक दोषी करार

पोल खोल न्यूज़ । शिमला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना के एक मामले में निचली अदालत का फैसला पलटते हुए आरोपी चालक को दोषी ठहराया है।

न्यायाधीश राकेश कैंथला ने कहा कि सड़क पर गलत दिशा में वाहन चलाना स्पष्ट रूप से लापरवाही है। अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 279 (लापरवाही से वाहन चलाना) और 338 (गंभीर चोट पहुंचाना) के तहत दोषी ठहराया।

कोर्ट ने पाया कि बोलेरो वाहन गलत दिशा में चल रही थी और यदि चालक अपनी बाईं ओर होता तो दुर्घटना टाली जा सकती थी। अदालत ने रोड रेगुलेशन रूल्स 1989 का हवाला देते हुए कहा कि बाईं ओर चलना चालक का कानूनी कर्तव्य है।

⚖️ पॉक्सो केस में बरी कर्मी की सेवा बहाल

हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में पॉक्सो अधिनियम के तहत बरी हुए कर्मचारी की सेवा बहाल करने का आदेश दिया है।

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी को केवल एफआईआर के आधार पर हटाया गया हो और बाद में वह ससम्मान बरी हो जाए, तो उसकी बर्खास्तगी कायम नहीं रखी जा सकती।

अदालत ने 20 दिसंबर 2022 के सेवा समाप्ति आदेश को रद्द करते हुए कर्मचारी को पूर्व सेवा तिथि से बहाल करने के निर्देश दिए। हालांकि, बरी होने की तिथि (30 दिसंबर 2023) से पहले की अवधि का वेतन देय नहीं होगा, लेकिन इसके बाद सभी लाभ मिलेंगे।

📍 दूसरे राज्य में अपराध, सुनवाई हिमाचल में भी संभव

तीसरे महत्वपूर्ण फैसले में हाईकोर्ट ने आपराधिक क्षेत्राधिकार को लेकर स्पष्ट किया कि यदि अपराध के कुछ हिस्से हिमाचल में घटित हुए हैं, तो यहां की अदालतों को मामले की सुनवाई का अधिकार है।

न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा कि यदि अपराध की कड़ियां अलग-अलग राज्यों से जुड़ी हों—जैसे ब्लैकमेलिंग या पैसों का लेनदेन हिमाचल में हुआ हो—तो यह “निरंतर अपराध” माना जाएगा और राज्य की अदालतें सुनवाई कर सकती हैं।

यह मामला हरियाणा के कुरुक्षेत्र और हिमाचल के ऊना जिला से जुड़ा था, जहां बैंक लेनदेन और जबरन वसूली हिमाचल में हुई थी।

📌 निष्कर्ष

इन तीनों फैसलों में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि

  • सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन सीधे तौर पर आपराधिक लापरवाही है।
  • केवल एफआईआर के आधार पर सेवा समाप्ति न्यायसंगत नहीं
  • बहु-राज्यीय अपराधों में न्यायिक क्षेत्राधिकार व्यापक हो सकता है

ये निर्णय कानून के दायरे में न्याय, जवाबदेही और नागरिक अधिकारों की रक्षा को मजबूत करते हैं।

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