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नशे में ड्राइविंग पर सख्त रुख, हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रख दी कड़ी चेतावनी

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नशे में ड्राइविंग पर सख्त रुख, हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रख दी कड़ी चेतावनी

पोल खोल न्यूज़ | शिमला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नशे की हालत में लापरवाही से वाहन चलाने के एक मामले में आरोपी की सजा को बरकरार रखते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि सड़क सुरक्षा के मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी स्वीकार नहीं की जाएगी। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा कि नशे में वाहन चलाना समाज के लिए गंभीर खतरा है और इससे निर्दोष लोगों की जान जोखिम में पड़ती है।

न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने यह फैसला निचली अदालतों के निर्णय के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों को देखते हुए दोषियों के प्रति सख्त रुख अपनाना जरूरी है।

कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में सड़क हादसे एक गंभीर समस्या बन चुके हैं और आम लोग, पैदल यात्री तथा नियमों का पालन करने वाले चालक हमेशा जोखिम में रहते हैं। ऐसे मामलों में “रहम” की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

अदालत ने आरोपी को प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट के तहत राहत देने से भी इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रैश ड्राइविंग के मामलों में सजा ऐसी होनी चाहिए जो समाज में निवारक प्रभाव डाले।

आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 279 और मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं 181, 185 और 192ए के तहत एक महीने के कारावास और जुर्माने की सजा दी गई है।


2011 का मामला, कानूनी सीमा से 9 गुना अधिक नशे में था चालक

यह मामला 21 सितंबर 2011 का है, जब नाहन के कटासन क्षेत्र में एक टिपर चालक ने शराब के नशे में तेज रफ्तार से वाहन चलाते हुए सामने से आ रहे ट्रक को टक्कर मार दी। हादसे में उसका वाहन पलट गया और ट्रक को भारी नुकसान पहुंचा। हालांकि, इस दुर्घटना में किसी की जान नहीं गई।

पुलिस जांच में आरोपी के खून में अल्कोहल की मात्रा 268.18 एमजी प्रतिशत पाई गई, जबकि मोटर वाहन अधिनियम के तहत निर्धारित सीमा 30 एमजी प्रति 100 एमएल है। यानी आरोपी कानूनी सीमा से करीब 9 गुना अधिक नशे में था।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के पास न तो वैध ड्राइविंग लाइसेंस था और न ही वाहन का रूट परमिट।


📌 इन्फो बॉक्स

  • मामला: नशे में लापरवाही से वाहन चलाना
  • घटना तिथि: 21 सितंबर 2011
  • स्थान: कटासन, नाहन
  • अदालत का फैसला: सजा बरकरार, पुनर्विचार याचिका खारिज
  • सजा: 1 माह कारावास + जुर्माना
  • कानूनी धाराएं:
    • IPC धारा 279
    • मोटर वाहन अधिनियम 181, 185, 192ए
  • अल्कोहल स्तर: 268.18 एमजी (सीमा 30 एमजी)

📊 संदेश:

  • नशे में ड्राइविंग पर सख्त कार्रवाई
  • सड़क सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कोई नरमी नहीं
  • दोषियों के खिलाफ निवारक सजा जरूरी

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