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तीर्थन और सैंज को फिर मिला अलग अभयारण्य का दर्जा, वन्यजीव संरक्षण को मिलेगी नई मजबूती

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तीर्थन और सैंज को फिर मिला अलग अभयारण्य का दर्जा, वन्यजीव संरक्षण को मिलेगी नई मजबूती

पोल खोल न्यूज़ | शिमला

हिमाचल प्रदेश सरकार ने कुल्लू जिले के तीर्थन और सैंज क्षेत्रों को पुनः अलग-अलग वन्यजीव अभयारण्य के रूप में बहाल कर दिया है। वन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब इन दोनों क्षेत्रों को ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में प्रस्तावित विलय से अलग कर दिया गया है।

यह निर्णय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के प्रावधानों के तहत लिया गया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1999 में सरकार ने 61 वर्ग किलोमीटर के तीर्थन और 90 वर्ग किलोमीटर के सैंज क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया था। बाद में वर्ष 2010 में अधिसूचना जारी कर इन दोनों क्षेत्रों को ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में मिलाने का प्रस्ताव रखा गया था।

हालांकि, 26 जून 2025 को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने इन क्षेत्रों को पार्क में शामिल न करने की सिफारिश की थी। इसी सिफारिश को स्वीकार करते हुए राज्यपाल ने 2010 की अधिसूचना को रद्द कर 1999 की मूल अधिसूचनाओं को पुनः लागू कर दिया है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस फैसले से स्थानीय पारिस्थितिकी संरक्षण को मजबूती मिलेगी। क्षेत्र विशेष की जैव विविधता के अनुसार प्रबंधन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। साथ ही स्थानीय समुदायों और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। अब वन विभाग दोनों अभयारण्यों के लिए अलग-अलग प्रबंधन योजनाएं तैयार करेगा, जिससे संरक्षण, पर्यटन और स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाया जा सके।


वन्यजीव अपराधों की जांच अब एसीएफ स्तर के अधिकारी भी करेंगे

प्रदेश सरकार ने वन्यजीव अपराधों पर सख्ती बढ़ाते हुए जांच अधिकारों का दायरा भी बढ़ा दिया है। नए आदेश के तहत सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) और उससे ऊपर के अधिकारी अब वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 वन्यजीव मामलों की जांच कर सकेंगे।

वन विभाग के अनुसार, वन्यजीव प्रभाग और क्षेत्रीय वन प्रभाग के एसीएफ रैंक तथा उससे ऊपर के सभी अधिकारी अब के तहत दर्ज मामलों की सीधे जांच करने के लिए अधिकृत होंगे।

राज्य में वन्यजीव तस्करी, अवैध शिकार और संरक्षित प्रजातियों को नुकसान पहुंचाने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। पहले जांच के अधिकार सीमित होने के कारण कई मामलों में कार्रवाई में देरी होती थी, लेकिन अब अधिक अधिकारियों को अधिकार मिलने से जांच प्रक्रिया तेज होगी और वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद है।


📌 इन्फो बॉक्स

  • क्षेत्र: तीर्थन (61 वर्ग किमी), सैंज (90 वर्ग किमी)
  • जिला: कुल्लू
  • फैसला: दोनों क्षेत्रों को पुनः अलग वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया
  • कानूनी आधार: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972
  • मुख्य लाभ:
    • स्थानीय जैव विविधता के अनुसार बेहतर प्रबंधन
    • संरक्षण योजनाओं में लचीलापन
    • स्थानीय समुदायों के साथ बेहतर समन्वय
  • नई व्यवस्था:
    • एसीएफ स्तर तक के अधिकारी कर सकेंगे जांच
    • वन्यजीव अपराधों पर तेज कार्रवाई संभव

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