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मुद्दे की बात: नकली दवाओं के निर्माता लोगों के दुश्मन, सख्ती से रोका जाए नकली दवाओं का कारोबार

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मुद्दे की बात:नकली दवाओं के निर्माता लोगों के दुश्मन, सख्ती से रोका जाए नकली दवाओं का कारोबार

घटिया और नकली दवाएं बन रहीं मौत का कारण, दोषियों को मिले कड़ी सजा; हर दवा पर क्यूआर कोड लागू करने की मांग तेज

रजनीश शर्मा | विशेष रिपोर्ट

भारत को दुनिया की सबसे बड़ी दवा निर्माण शक्तियों में गिना जाता है। देश को “विश्व की फार्मेसी” कहा जाता है, क्योंकि यहां दुनिया की बड़ी आबादी के लिए जीवन रक्षक दवाएं और वैक्सीन तैयार होती हैं। लेकिन इसी के साथ नकली और घटिया दवाओं का बढ़ता कारोबार देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन गया है।

हाल के वर्षों में नकली और गुणवत्ता में खराब दवाओं के कारण कई राज्यों में मरीजों की मौत के मामले सामने आए हैं। दवा गुणवत्ता जांच के दौरान बड़ी संख्या में दवाओं के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतर पाए। कुछ मामलों में प्रसिद्ध कंपनियों के नाम का दुरुपयोग कर नकली इंजेक्शन और अन्य जीवनरक्षक दवाएं बाजार में बेची गईं, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ गई।

दवा नियामक एजेंसियों की जांच में यह भी सामने आया कि कई दवाओं में आवश्यक औषधीय तत्व निर्धारित मात्रा में नहीं पाए गए। ऐसे मामलों में संबंधित कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए गए और जांच एजेंसियों ने कार्रवाई शुरू की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नकली दवाओं का कारोबार केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध है। ऐसे कारोबारी सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ करते हैं। इसलिए इनके खिलाफ हत्या जैसे गंभीर अपराधों के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

केंद्र सरकार द्वारा कुछ महत्वपूर्ण दवाओं पर क्यूआर कोड लागू करने की पहल का स्वागत किया जा रहा है। इससे दवा की असली-नकली की पहचान, निर्माता, बैच नंबर और अन्य जानकारी आसानी से सत्यापित की जा सकेगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्था केवल चुनिंदा दवाओं तक सीमित न रहकर सभी दवाओं पर लागू की जानी चाहिए।

क्या होने चाहिए ठोस कदम?

सभी जीवनरक्षक और सामान्य दवाओं पर क्यूआर कोड अनिवार्य किया जाए।

नकली दवा बनाने और बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।

दवा निर्माण इकाइयों की नियमित और पारदर्शी जांच की जाए।

मेडिकल स्टोरों पर दवाओं की खरीद-बिक्री की सख्त निगरानी रखी जाए।

आम लोगों को भी दवा खरीदते समय बिल लेने और पैकिंग की जांच करने के लिए जागरूक किया जाए।

मुद्दे की बात

नकली दवा बनाने वाले केवल कानून के नहीं, बल्कि समाज और मानवता के भी सबसे बड़े दुश्मन हैं। ऐसे लोगों की वजह से निर्दोष मरीज अपनी जान गंवाते हैं। सरकार, दवा कंपनियों, चिकित्सकों और आम जनता को मिलकर इस काले कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए सख्त और प्रभावी कदम उठाने होंगे, ताकि किसी भी परिवार को नकली दवा के कारण अपनों को खोने का दर्द न झेलना पड़े।

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