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स्पीति में मिले पोटेंटिला अर्जिरोफाइला पौधे में छिपा है स्वास्थ्य का खजाना, इन बीमारियों में असरदार

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स्पीति में मिले पोटेंटिला अर्जिरोफाइला पौधे में छिपा है स्वास्थ्य का खजाना, इन बीमारियों में असरदार

पोल खोल न्यूज़ शिमला

सिल्वर नैनोपार्टिकल्स वाले इस पौधे में जीवाणुरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए गए हैं, जो मधुमेह जैसी बीमारियों के मरीजों के लिए रामबाण साबित हो सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में एक ऐसा पौधा मिला है, जिसमें स्वास्थ्य का खजाना छिपा है। सिल्वर नैनोपार्टिकल्स वाले इस पौधे में जीवाणुरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए गए हैं, जो मधुमेह जैसी बीमारियों के मरीजों के लिए रामबाण साबित हो सकते हैं। एचपीयू, बिलासपुर काॅलेज और अग्रसेन विवि की संयुक्त खोज में यह खुलासा हुआ है। टीम ने स्पीति घाटी के कुंजुम दर्रा क्षेत्र से पोटेंटिला अर्जिरोफाइला नामक पौधे के नमूने एकत्र किए। इस पौधे का उपयोग आयुर्वेद, सिद्ध और सोवा-रिग्पा जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, रोगाणुरोधी और अल्फा-अमाइलेज अवरोधक गुण मौजूद हैं।

पौधे के अर्क से बने हरित सिल्वर नैनोपार्टिकल्स ने उल्लेखनीय प्रभाव दिखाया। इन नैनोपार्टिकल्स ने विभिन्न रोगजनकों के खिलाफ सामान्य अर्क से बेहतर परिणाम दिए। यह खोज भविष्य में नई दवाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। सिल्वर नैनोपार्टिकल्स ने कई रोगजनकों के विरुद्ध प्रभावी कार्य किया। इनमें स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटान्स, ई. कोलाई, बैसिलस सेरियस और कैंडिडा एल्बिकन्स शामिल हैं। इन नैनोपार्टिकल्स ने इन रोगजनकों के खिलाफ सामान्य पौधे के अर्क की तुलना में अधिक क्षमता दिखाई। यह खोज जैव-चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण हो सकती है। पोटेंटिला अर्जिरोफाइला वनस्पति का पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में लंबा इतिहास रहा है। इस शोध ने इन पारंपरिक दावों को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया है। अल्फा-अमाइलेज अवरोधक गुण मधुमेह प्रबंधन में इसकी संभावित भूमिका को दर्शाते हैं।
हिमालयी क्षेत्र की वनस्पतियों के संरक्षण को बढ़ावा
इस खोज को शोध पत्र में स्थान दिया गया है। यह अध्ययन मार्च 2026 में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका केमिस्ट्रीसेलेक्ट में प्रकाशित हुआ है। यह शोध पत्र विशेषज्ञों ज्योति राणा, आनंद सागर, जागृति राणा और संजीव कुमार ने तैयार किया। यह अध्ययन हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के जैव विज्ञान विभाग में हुआ है। महाराजा अग्रसेन विश्वविद्यालय सोलन के स्कूल ऑफ बेसिक एंड एप्लाइड साइंसेज और राजकीय महाविद्यालय, बिलासपुर के वनस्पति विज्ञान विभाग के शोधकर्ता भी इस टीम का हिस्सा रहे। यह बहु-संस्थागत सहयोग हिमालयी क्षेत्र की वनस्पतियों के संरक्षण को बढ़ावा देगा।
हिमाचल में बड़ी संख्या में औषधीय पौधे हैं। बस इनकी पहचान की जरूरत है। इन पौधों को दवाइयों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। स्पीति घाटी में पाए जाने वाले पोटेंटिला अर्जिरोफाइला नामक पौधे को दवाइयों के लिए आयुर्वेद दवाओं के इस्तेमाल में लाया जाएगा। आयुर्वेद विभाग की टीम इस बारे में विस्तृत जानकारी जुटाएगी।

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