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हमीरपुर में सस्पेंस बरकरार: जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पर नहीं बनी सहमति, बमसन सहित कई पंचायत समितियों के चुनाव भी अटके

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हमीरपुर में सस्पेंस बरकरार: जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पर नहीं बनी सहमति, बमसन सहित कई पंचायत समितियों के चुनाव भी अटके

भाजपा और कांग्रेस दोनों ने जताया बहुमत का दावा,
अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव की तारीख तय होने का इंतजार

रजनीश शर्मा | हमीरपुर

हमीरपुर जिले में पंचायती राज संस्थाओं के गठन की प्रक्रिया अभी पूरी तरह से आगे नहीं बढ़ पाई है। जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर अभी तक आम सहमति नहीं बन सकी है। वहीं, जिले की पांच पंचायत समितियों में भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है, जिससे नवनिर्वाचित सदस्यों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा।

जानकारी के अनुसार, जिले की पांच पंचायत समितियों में से केवल भोरंज पंचायत समिति में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो सकी है। यहां कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार अध्यक्ष बनी हैं, जबकि उपाध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार निर्वाचित हुए हैं। अन्य चार पंचायत समितियों में अब तक चुनाव की तिथि घोषित नहीं की गई है।

बमसन, हमीरपुर, सुजानपुर, नादौन और बिझड़ी पंचायत समितियों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। दोनों प्रमुख दल—भाजपा और कांग्रेस—अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों के जीतने का दावा कर रहे हैं और सदस्यों को अपने पक्ष में करने की कवायद जारी है।

जिला परिषद में भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की तारीख अभी तय नहीं हो सकी है। राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। भाजपा का दावा है कि अधिकांश पंचायत समितियों और जिला परिषद में उसके समर्थित सदस्य अधिक संख्या में जीतकर आए हैं, इसलिए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद भी भाजपा के खाते में जाएंगे।

वहीं कांग्रेस का कहना है कि जहां आवश्यक होगा वहां लोकतांत्रिक तरीके से बहुमत के आधार पर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुने जाएंगे। पार्टी नेताओं का दावा है कि कई स्थानों पर कांग्रेस समर्थित सदस्य एकजुट हैं और उनके पक्ष में परिणाम आने की पूरी संभावना है।

फिलहाल जिले में पंचायत समितियों और जिला परिषद के शीर्ष पदों के चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अब सभी की निगाहें प्रशासन द्वारा चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने पर टिकी हैं। चुनाव की तारीख तय होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि जिले की पंचायती राज संस्थाओं की कमान किस राजनीतिक दल के हाथ में जाएगी।

 

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