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ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों पर दांव: पंचायती राज चुनावों में संगठन की परीक्षा, महिलाओं को दरकिनार करने पर उठे सवाल

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ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों पर दांव: पंचायती राज चुनावों में संगठन की परीक्षा, महिलाओं को दरकिनार करने पर उठे सवाल

रजनीश शर्मा। हमीरपुर

पंचायती राज संस्थाओं के आगामी चुनावों को लेकर कांग्रेस संगठन में हलचल तेज हो गई है। जिला स्तर से लेकर ब्लॉक अध्यक्षों तक पुरानी टीम पर ही भरोसा जताया गया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी इस बार किसी नई ‘कंट्रोवर्सी’ से बचते हुए अनुभव के आधार पर चुनावी रणनीति तैयार करना चाहती है। हालांकि इस फैसले ने कई नए चेहरों और कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, वहीं संगठन के भीतर संतुलन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

सूत्रों के अनुसार, जिला और ब्लॉक कार्यकारिणियों के जल्द ऐलान की उम्मीद जताई जा रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि पंचायत चुनावों से पहले संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना जरूरी है, ताकि जमीनी स्तर पर बेहतर तालमेल के साथ चुनाव लड़ा जा सके। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि ब्लॉक अध्यक्षों के चयन में महिलाओं को पूरी तरह नजरअंदाज क्यों किया गया। एक भी महिला को ब्लॉक अध्यक्ष न बनाए जाने से संगठन की कार्यप्रणाली और महिला सशक्तिकरण के दावों पर सवाल उठने लगे हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पंचायत चुनावों में स्थानीय नेतृत्व की भूमिका बेहद अहम होती है और ऐसे में ब्लॉक अध्यक्षों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। हमीरपुर जिला में पांच विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत सभी ब्लॉकों में अध्यक्षों की नियुक्ति पहले ही तय हो चुकी है और अधिकतर स्थानों पर पुराने चेहरों को ही दोबारा मौका दिया गया है। इनमें वे नेता भी शामिल हैं, जो पहले चुनावों में सक्रिय रहे हैं और संगठनात्मक अनुभव रखते हैं।

हालांकि पार्टी के अंदर यह चर्चा भी जोरों पर है कि क्या सिर्फ पुराने चेहरों के भरोसे चुनावी नैया पार लग पाएगी या फिर नए नेतृत्व की कमी पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है। वहीं दूसरी ओर, भाजपा के मुकाबले संगठन को मजबूत करने की चुनौती भी कांग्रेस के सामने बनी हुई है, क्योंकि लंबे समय से जिला स्तर पर पार्टी का ढांचा उतना सक्रिय नहीं रहा जितना अपेक्षित था।

अब नजर इस बात पर टिकी है कि जल्द घोषित होने वाली कार्यकारिणियों में क्या संतुलन साधा जाता है और क्या महिलाओं व युवाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिल पाता है या नहीं। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो पंचायत चुनावों में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।

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