
बढ़ती चिंता: हिमाचल में नौनिहालों पर कुपोषण की मार, 6 साल तक के बच्चों में ठिगनापन बढ़ा
पोल खोल न्यूज। हमीरपुर

हिमाचल प्रदेश में बाल स्वास्थ्य को लेकर एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। 6 साल तक के बच्चों में पोषण की कमी के चलते न सिर्फ कुपोषण बढ़ रहा है, बल्कि बच्चों की लंबाई और समग्र विकास भी प्रभावित हो रहा है। सरकारी योजनाओं के बावजूद जागरूकता की कमी और संतुलित आहार का अभाव इस समस्या को और गहरा बना रहा है।
पोषण की कमी बना सबसे बड़ा कारण
प्रदेश में बड़ी संख्या में बच्चे आवश्यक पोषक तत्वों से वंचित हैं। खासकर प्रोटीन और आयरन की कमी बच्चों के शारीरिक विकास को रोक रही है। संतुलित आहार न मिलने से बच्चों में कमजोरी, कम वजन और ठिगनापन तेजी से बढ़ रहा है।

अभिभावकों में जागरूकता की कमी
बाल विकास विभाग द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन इनका पूरा लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में माता-पिता को सही पोषण, टीकाकरण और बच्चों की देखभाल संबंधी जानकारी का अभाव साफ दिखाई देता है।
जिलों में कुपोषण की स्थिति चिंताजनक
प्रदेश के कई जिलों में कुपोषण के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा और ऊना जैसे जिलों में कम वजन और ठिगने बच्चों की संख्या अधिक है। यह संकेत है कि समस्या केवल सीमित क्षेत्र की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में फैली हुई है।

ठिगनापन (Stunting) बना बड़ा खतरा
कम उम्र में बच्चों की लंबाई का सही से न बढ़ना भविष्य में उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर असर डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति लंबे समय तक कुपोषण रहने का परिणाम है।
सरकार का लक्ष्य: 2030 तक कुपोषण मुक्त हिमाचल
राज्य सरकार ने 2030 तक कुपोषण खत्म करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए आंगनवाड़ी केंद्रों, पोषण अभियानों और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को विशेष देखरेख और चिकित्सा सुविधा दी जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चों को समय पर संतुलित आहार, नियमित जांच और सही देखभाल मिले तो कुपोषण से बचाव संभव है। गर्भावस्था से ही पोषण पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
इन्फो बॉक्स: कुपोषण की मुख्य वजहें
संतुलित आहार की कमी
प्रोटीन व आयरन की कमी
अभिभावकों में जागरूकता का अभाव

स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच
आर्थिक और सामाजिक कारण
इन्फो बॉक्स: कैसे करें बचाव
बच्चों को पौष्टिक और संतुलित भोजन दें
नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं
टीकाकरण समय पर करवाएं
आंगनवाड़ी सेवाओं का लाभ उठाएं
मां और बच्चे दोनों के पोषण पर ध्यान दें
हिमाचल में कुपोषण एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। इसे केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि सामूहिक जागरूकता और जिम्मेदारी से ही खत्म किया जा सकता है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ी का भविष्य प्रभावित हो सकता है।

Author: Polkhol News Himachal








