best news portal development company in india

डंके की चोट पर : ड्राई स्पैल से जंगलों में धधकती आग से बढ़ाई चिंता, हर साल लाखों बेजुबान जानवर जिंदा जलते हैं

SHARE:

डंके की चोट पर : ड्राई स्पैल से जंगलों में धधकती आग से बढ़ाई चिंता, हर साल लाखों बेजुबान जानवर जिंदा जलते हैं

सैटेलाइट से आग का पता लगाने की व्यवस्था मौजूद, लेकिन आग लगाने वाला आज तक नहीं पकड़ा गया


रजनीश शर्मा। हमीरपुर 

इस बार मार्च माह में ही गर्मी मई जैसा पसीना बहाने लग पड़ी है। ड्राई स्पैल ने जंगलों में आग लगने की घटनाओं को बढ़ा दिया है। आइए वन विभाग की इस बारे हर साल की तैयारियों की पोल खोलते हैं….

हिमाचल सहित देश के कई हिस्सों में हर साल जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं। इन घटनाओं में करोड़ों रुपये की वन संपदा जलकर राख हो जाती है और लाखों बेजुबान जानवर जिंदा जल जाते हैं। चिंताजनक बात यह है कि आग लगाने के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान होने के बावजूद आज तक किसी बड़े मामले में आरोपी न तो पकड़ा गया और न ही किसी को सजा मिल पाई है।


सैटेलाइट से मिलती है आग की जानकारी

वन विभाग के अनुसार जंगलों में लगने वाली आग की जानकारी अब सैटेलाइट के माध्यम से तुरंत मिल जाती है। विभाग को अलर्ट मिलते ही संबंधित क्षेत्र के कर्मचारियों को मौके पर भेजा जाता है ताकि आग पर काबू पाया जा सके। बावजूद इसके आग लगाने वालों की पहचान करना अभी भी चुनौती बना हुआ है।


इंसानी लापरवाही बन रही बड़ी वजह

वन अधिकारियों का मानना है कि जंगलों में लगने वाली अधिकतर आग मानव लापरवाही या जानबूझकर लगाई जाती है। कई बार लोग घास उगाने, जमीन साफ करने या अन्य निजी कारणों से आग लगा देते हैं। यह आग धीरे-धीरे फैलकर बड़े जंगल को अपनी चपेट में ले लेती है और वन्यजीवों के लिए मौत का कारण बन जाती है।


वन्यजीवों पर पड़ता है सबसे बड़ा असर

जंगलों में आग लगने का सबसे बड़ा खामियाजा वहां रहने वाले वन्यजीवों को भुगतना पड़ता है। आग लगने पर पक्षी, छोटे जानवर, सरीसृप और कई दुर्लभ प्रजातियां जलकर मर जाती हैं। कई जानवर अपना प्राकृतिक आवास खो देते हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है।


विभाग की तैयारियां लेकिन चुनौती बरकरार

वन विभाग द्वारा आग से निपटने के लिए फायर लाइन, उपकरण और कर्मचारियों की तैनाती की जाती है। इसके अलावा लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जाते हैं। इसके बावजूद पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में आग पर काबू पाना काफी मुश्किल हो जाता है।


⚠️  चेतावनी संदेश

1. जंगल बचेंगे तो जीवन बचेगा
जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं बल्कि पूरे जीवन तंत्र का आधार हैं। इन्हें जलाना भविष्य को जलाने जैसा है।

2. एक चिंगारी बन सकती है बड़ी तबाही
जंगलों में फेंकी गई एक जलती बीड़ी या माचिस भी सैकड़ों हेक्टेयर जंगल को राख कर सकती है।

3. जिम्मेदारी हर नागरिक की
जंगलों को बचाने के लिए केवल सरकार नहीं बल्कि आम लोगों को भी जागरूक और जिम्मेदार बनना होगा।


📊 इन्फो बॉक्स

जंगलों में आग से जुड़ी अहम बातें

  • हर साल सैकड़ों जंगलों में आग की घटनाएं दर्ज
  • करोड़ों रुपये की वन संपदा होती है नष्ट
  • लाखों वन्यजीवों की मौत
  • आग लगाने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान
  • सैटेलाइट से मिलती है आग की तत्काल जानकारी
  • फिर भी आज तक बड़े मामलों में आरोपी नहीं पकड़े गए

Leave a Comment

error: Content is protected !!

Follow Us Now