best news portal development company in india

हमीरपुर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का झांसा देकर बुजुर्ग दंपती से 80 हजार की ठगी, बैंक की सतर्कता से 6 लाख बचाए

SHARE:

हमीरपुर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का झांसा देकर बुजुर्ग दंपती से 80 हजार की ठगी, बैंक की सतर्कता से 6 लाख बचाए

पोल खोल न्यूज़ डेस्क । हमीरपुर

साइबर ठगों ने खुद को एंटी टेररिस्ट अधिकारी बताकर 78 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी और उनकी पत्नी को लगभग 20 घंटे तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर मानसिक दबाव में रखा और उनसे 80 हजार रुपये ठग लिए। ठगों ने दंपती को दिल्ली बम ब्लास्ट और आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता का डर दिखाकर उनका मनोबल तोड़ा। हालांकि, बैंक प्रबंधन की सतर्कता से दंपती की 6 लाख रुपये की एफडी टूटने से बच गई और बड़ी ठगी टल गई।

पुलिस के अनुसार, 19 फरवरी को बुजुर्ग दंपती को एक कॉल आई, जिसमें कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को एंटी टेररिस्ट सेल का अधिकारी बताया। ठगों ने कहा कि उनके बैंक खाते और मोबाइल नंबर का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों में हो रहा है। यह सुनकर दंपती घबरा गए, लेकिन जब उन्होंने संदेह जताया तो ठगों ने वीडियो कॉल के माध्यम से फर्जी दस्तावेज दिखाकर खुद को सरकारी अधिकारी साबित करने की कोशिश की।

ठगों ने दस्तावेज सत्यापन और जांच प्रक्रिया का हवाला देते हुए दंपती से 80 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए। इसके बाद ठगों ने उन्हें अगले दिन बैंक जाकर एफडी तुड़वाने के लिए कहा और सख्त निर्देश दिए कि वे घर से बाहर न निकलें और किसी को इस बारे में जानकारी न दें।

अगले दिन 20 फरवरी को दंपती जब आईसीआईसीआई बैंक की भोटा चौक शाखा पहुंचे और 6 लाख रुपये की एफडी तुड़वाने की प्रक्रिया शुरू की, तो शाखा प्रबंधक मनीष मनु को मामला संदिग्ध लगा। उन्होंने बुजुर्ग को अपने केबिन में बुलाकर पूरी जानकारी ली। बातचीत के दौरान बुजुर्ग ने ठगों की धमकियों और वीडियो कॉल की पूरी बात बताई।

शाखा प्रबंधक ने तुरंत ठगों से फोन पर बात की, जिससे पूरा मामला स्पष्ट हो गया कि यह साइबर ठगी का मामला है। इसके बाद बैंक ने तुरंत बुजुर्ग के परिवार को सूचित किया और साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई। साथ ही, बुजुर्ग का नया बैंक खाता खुलवाकर उनकी जमा पूंजी को सुरक्षित किया गया।

शाखा प्रबंधक मनीष मनु ने बताया कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर तुरंत बैंक या पुलिस से संपर्क करें और किसी भी स्थिति में फोन पर अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें।

एसपी हमीरपुर बलवीर ठाकुर ने भी नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पुलिस कभी भी किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही फोन पर बैंक खाते से संबंधित जानकारी मांगती है। यदि कोई व्यक्ति इस तरह की कॉल प्राप्त करता है, तो उसे तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए।

इससे पहले जनवरी महीने में भी साइबर अपराधियों ने एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी को हनीट्रैप में फंसाकर 16.53 लाख रुपये की ठगी की थी, जिसमें उत्तर प्रदेश से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, पिछले वर्ष हमीरपुर में एक अन्य सेवानिवृत्त अधिकारी से 82 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आ चुका है। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि साइबर अपराधी बुजुर्गों को निशाना बनाकर बड़ी ठगी को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं।


📦 INFO BOX

मामला: डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर ठगी
स्थान: भोटा चौक, हमीरपुर
पीड़ित: 78 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी और उनकी पत्नी
ठगी की राशि: 80,000 रुपये
बचाई गई राशि: 6,00,000 रुपये (एफडी)

ठगी का तरीका:

  • खुद को एंटी टेररिस्ट अधिकारी बताकर कॉल
  • वीडियो कॉल पर फर्जी दस्तावेज दिखाए
  • आतंकी गतिविधियों में फंसाने का डर दिखाया
  • डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर पैसे ट्रांसफर करवाए

कैसे बची बड़ी ठगी:

  • बैंक शाखा प्रबंधक को हुआ संदेह
  • पीड़ित से बातचीत कर सच्चाई जानी
  • परिवार और साइबर पुलिस को तुरंत सूचना दी
  • नया बैंक खाता खुलवाकर रकम सुरक्षित की गई

पुलिस की अपील:

  • डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती
  • फोन पर बैंक डिटेल्स या OTP साझा न करें
  • संदिग्ध कॉल की तुरंत पुलिस को सूचना दें
  • घबराएं नहीं, पहले सत्यापन करें



Leave a Comment

best news portal development company in india
best news portal development company in india
सबसे ज्यादा पढ़ी गई
error: Content is protected !!

Follow Us Now