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डंगा धंसने से टूटी टौणी देवी–उहल सड़क, प्रशासन के दावों पर सवाल

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  • डंगा धंसने से टूटी टौणी देवी–उहल सड़क, प्रशासन के दावों पर सवाल

  • 20 फरवरी तक बंद मार्ग, विवाह-शादियों के मौसम में हजारों लोग बेहाल

रजनीश शर्मा। हमीरपुर 

लोक निर्माण विभाग टौणी देवी के तहत टौणी देवी–उहल–कक्कड़ सड़क पर डंगा धंसने से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। 31 जनवरी शनिवार को  सड़क का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है। फिलहाल केवल छोटे वाहन ही किसी तरह गुजर पा रहे हैं, लेकिन खतरा बरकरार है।

बरसात के दौरान इस सड़क पर कई स्थानों पर डंगे धंस चुके हैं। बीते दिनों एक और डंगा धंसने से स्थिति और गंभीर हो गई। सुरक्षा कारणों से बसों, ट्रकों सहित सभी बड़े वाहनों पर रोक लगा दी गई है, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों की परेशानियां चरम पर पहुंच गई हैं।

20 फरवरी तक बंद रहेगी टौणी देवी–उहल सड़क

उधर जिला प्रशासन ने आदेश जारी कर कहा है कि  उपमंडल हमीरपुर के अंतर्गत टौणी देवी–उहल सड़क पर मरम्मत कार्य के चलते 20 फरवरी तक यातायात पूरी तरह बंद कर दिया गया है। प्रशासन की ओर से वैकल्पिक मार्ग—कसीरी महादेव–चौरी–उहल, कसीरी महादेव–पुंघ–छतरुड़ू तथा बराड़ा से पटनौण, बाकर खड्ड, परनाली होते हुए उहल—निर्धारित किए गए हैं, लेकिन ये रास्ते लोगों की मुश्किलें कम करने के बजाय बढ़ा रहे हैं।

विवाह-शादियों के मौसम में भारी मार

इन दिनों क्षेत्र में विवाह-शादियों का जोर है। ऐसे समय सड़क बंद होने से हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं। बारातियों, रिश्तेदारों, मरीजों और रोजाना सफर करने वालों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई गांवों के लोग समय पर कार्यक्रमों में नहीं पहुंच पा रहे, वहीं आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाना भी चुनौती बन गया है।

ढिलमुल कार्य ने बढ़ाई परेशानी

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मरम्मत कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। लंबे समय से सड़क की हालत खराब थी, लेकिन समय रहते पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। अब जब मार्ग पूरी तरह बंद किया गया है, तो काम में ढिलाई के चलते जनता का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

20 किलोमीटर अतिरिक्त सफर की मजबूरी

सड़क बंद होने के कारण बसों को टौणी देवी पहुंचने के लिए करीब 20 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे न केवल यात्रा समय बढ़ गया है, बल्कि किराया, ईंधन खर्च और मानसिक परेशानी भी कई गुना बढ़ गई है।

जनता में रोष, जवाबदेही की मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि मरम्मत कार्य में तेजी लाई जाए और स्थायी समाधान निकाला जाए। लोगों का कहना है कि हर बरसात में यही हाल होता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग केवल अस्थायी पैच लगाकर अपनी जिम्मेदारी से बचते रहे हैं। अब सवाल यह है कि आखिर कब तक जनता ऐसी बदइंतजामी की कीमत चुकाती रहेगी।

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