
मानदेय के बिना पढ़ाने को मजबूर शिक्षक, सरकार की साल में एक बार सेवानिवृत्ति नीति सवालों में
पोल खोल न्यूज़ डेस्क । शिमला
हिमाचल प्रदेश में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए लागू की गई सरकार की साल में एक बार सेवानिवृत्ति की व्यवस्था अब खुद विवादों में घिरती नजर आ रही है। चालू शैक्षणिक सत्र में सेवानिवृत्ति न लेने वाले करीब 200 शिक्षक पिछले कई महीनों से बिना मानदेय के स्कूलों में पढ़ाने को मजबूर हैं।
सितंबर 2025 के बाद सेवा विस्तार पर तैनात इन शिक्षकों को अब तक मेहनताना नहीं मिल पाया है, जबकि स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था का पूरा भार इन्हीं पर टिका हुआ है।
सरकारी नीति के अनुसार, सेवानिवृत्ति आयु पूरी कर चुके शिक्षक यदि 31 मार्च 2026 तक सेवाएं देते हैं, तो उन्हें अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत मानदेय दिए जाने का प्रावधान है। इसी नीति के तहत कई शिक्षकों ने छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए बीच सत्र में सेवानिवृत्ति न लेकर सेवा विस्तार स्वीकार किया।
हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि सितंबर 2025 के बाद सेवाविस्तार पर नियुक्त शिक्षकों को आज तक भुगतान नहीं किया गया है। शिक्षकों द्वारा विभागीय स्तर पर कई बार गुहार लगाने के बावजूद फाइलें नियमों और मंजूरियों में उलझी हुई हैं।
ये भी पढ़ें: नशे की लत युवाओं को एचआईवी की ओर धकेल रही है, सोलन में 72 नए मामले सामने आए
शिक्षकों का आरोप है कि सरकार ने नीति तो बना दी, लेकिन इसके वित्तीय और प्रशासनिक प्रबंधन की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की। नियमों के अनुसार, सेवानिवृत्ति लेने के इच्छुक शिक्षकों को तय तिथि से कम से कम दो माह पूर्व लिखित सूचना देनी होती है। इस बाध्यता के कारण कई शिक्षक न तो बीच सत्र में सेवानिवृत्ति ले पा रहे हैं और न ही उन्हें मानदेय मिल रहा है।
पेंशन के सहारे दे रहे सेवाएं
चालू सत्र में सेवा विस्तार लेने वाले शिक्षकों में प्रिंसिपल, प्रवक्ता, जेबीटी, एलटी और शास्त्री शामिल हैं। अगस्त 2025 में जारी अधिसूचना के अनुसार इन्हें पेंशन के अतिरिक्त अंतिम देय वेतन की आधी राशि मानदेय के रूप में दी जानी है। एक अप्रैल 2026 के बाद इन्हें सेवानिवृत्ति से जुड़े सभी वित्तीय लाभ मिलने का प्रावधान है।
जल्द भुगतान हो : शिक्षक
राजधानी शिमला स्थित वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लालपानी के प्रिंसिपल पवन कुमार सोनी और सरस्वतीनगर स्थित नगर सावड़ा स्कूल के प्रिंसिपल नविंद्र केजटा ने बताया कि सेवा विस्तार के बावजूद अब तक मानदेय जारी नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार के आग्रह पर उन्होंने चालू सत्र में सेवानिवृत्ति नहीं ली, लेकिन भुगतान न होने से भारी निराशा है।
मामले की जांच कराई जाएगी : शिक्षा मंत्री
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद सेवा विस्तार पर नियुक्त शिक्षकों को मानदेय जारी न होने की जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है। विभागीय अधिकारियों से रिपोर्ट लेकर यदि भुगतान लंबित पाया गया तो जल्द राशि जारी की जाएगी।
📌 इन्फो बॉक्स
नीति : साल में एक बार सामूहिक सेवानिवृत्ति
सेवाविस्तार अवधि : 31 मार्च 2026 तक
मानदेय : अंतिम वेतन का 50%
प्रभावित शिक्षक : लगभग 200
भुगतान लंबित : सितंबर 2025 से
शिक्षक वर्ग : प्रिंसिपल, प्रवक्ता, जेबीटी, एलटी, शास्त्री
सरकार का दावा : जल्द जांच कर भुगतान किया जाएगा
Author: Polkhol News Himachal









