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मानवीय संवेदना और सहयोग की मिसाल बनी सेवानिवृत्ति

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मानवीय संवेदना और सहयोग की मिसाल बनी सेवानिवृत्ति

रजनीश शर्मा | हमीरपुर

स्वर्ण जयंती राजकीय (उत्कृष्ट) वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टौणी देवी में कार्यरत रहीं सेवादार सरोतां देवी ने आज 14 वर्षों की अंशकालिक तथा साढ़े पाँच वर्षों की नियमित सेवा पूर्ण करने के उपरांत सेवानिवृत्ति ग्रहण की। उनका यह सेवाकाल निष्ठा, समर्पण और परिश्रम की एक प्रेरणादायी मिसाल के रूप में विद्यालय के इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा। यह अवसर विद्यालय परिवार के लिए केवल एक औपचारिक विदाई नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना, सहयोग और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करने का भावपूर्ण क्षण बन गया।

अपने लंबे सेवाकाल के दौरान सरोतां देवी ने विद्यालय की दैनिक व्यवस्थाओं, स्वच्छता, अनुशासन तथा विद्यार्थियों और स्टाफ के सहयोग से जुड़े प्रत्येक दायित्व को पूरी ईमानदारी और लगन से निभाया। सीमित संसाधनों और अनेक व्यक्तिगत कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने कभी अपने कर्तव्यों से समझौता नहीं किया। अंशकालिक से नियमित सेवा तक की उनकी यात्रा संघर्ष, धैर्य और कर्मठता का सशक्त प्रतीक रही, जिसने सभी सहयोगियों और विद्यार्थियों को प्रेरित किया।

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सेवा की प्रकृति और नियमों के कारण सरोतां देवी पेंशन की पात्र नहीं बन सकीं, जो किसी भी कर्मचारी के लिए एक संवेदनशील स्थिति होती है। ऐसे में विद्यालय परिवार ने औपचारिकताओं से ऊपर उठकर एक अनुकरणीय पहल की। विद्यालय के प्रधानाचार्य रजनीश रांगड़ा के नेतृत्व में समस्त स्टाफ सदस्यों ने आपसी सहयोग से 31 हजार रुपये की नगद राशि एकत्र कर उन्हें सम्मानपूर्वक भेंट की। यह सहयोग केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उनके वर्षों के निस्वार्थ योगदान के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और संवेदना की सजीव अभिव्यक्ति था।

इस अवसर पर प्रधानाचार्य ने कहा कि किसी भी संस्था की पहचान उसके भवनों या नियमों से नहीं, बल्कि वहाँ कार्यरत कर्मचारियों के प्रति अपनाए गए मानवीय दृष्टिकोण से होती है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी का वास्तविक मूल्य सेवा पुस्तिका से नहीं, बल्कि उसके समर्पण, ईमानदारी और कार्य के प्रति निष्ठा से आँका जाना चाहिए। स्टाफ द्वारा किया गया यह सहयोग संवेदनशील नेतृत्व और मानवीय मूल्यों की सशक्त मिसाल है। सेवानिवृत्ति के अवसर पर विद्यालय परिसर में एक सादा किंतु अत्यंत भावपूर्ण समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सुरेश, कमल देव, भूपिंदर, लीना, कृष्ण सहित सरोतां देवी के परिवार के सदस्य एवं निकट संबंधी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

 

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