
हाईकोर्ट : भारत-पाक के बीच शांति चाहना देशद्रोह नहीं है, आरोपी युवक को जमानत
पोल खोल न्यूज़। शिमला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कांगड़ा जिले के युवक अभिषेक सिंह भारद्वाज को देशद्रोह के मामले में बड़ी राहत देते हुए सशर्त जमानत प्रदान की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच शांति की कामना करना या युद्ध की निरर्थकता पर राय व्यक्त करना देशद्रोह नहीं माना जा सकता।
यह मामला न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की पीठ के समक्ष आया। अदालत ने कहा कि युवक की सोशल मीडिया पोस्ट से किसी प्रकार की हिंसा, उपद्रव या सार्वजनिक अशांति की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई, इसलिए इसे राजद्रोह की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
अभिषेक भारद्वाज पर आरोप था कि उसने पाकिस्तान के एक व्यक्ति के साथ चैट के दौरान दोनों देशों के बीच तनाव को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणी की थी और युद्ध के खिलाफ मानवता का पक्ष रखा था। इसके अलावा सोशल मीडिया पर हथियारों और पाकिस्तान से जुड़े चित्र पोस्ट करने के आरोप में उसके खिलाफ पुलिस जिला देहरा में बीएनएस की धारा 152 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
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हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत देते हुए आरोपी को 50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए। साथ ही निर्देश दिए कि आरोपी अपना पासपोर्ट (यदि उपलब्ध हो) सरेंडर करेगा, किसी भी गवाह या साक्ष्य को प्रभावित नहीं करेगा और जमानत शर्तों का उल्लंघन नहीं करेगा। शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में ट्रायल कोर्ट को कानूनी कार्रवाई करने की छूट दी गई है।
अदालत ने अपने 19 पन्नों के आदेश में कहा कि दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखने की इच्छा को देशविरोधी गतिविधि नहीं कहा जा सकता। इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसियों द्वारा भी जांच की गई थी, लेकिन कोई ठोस देशद्रोही कृत्य सामने नहीं आया।
गौरतलब है कि देहरा उपमंडल के सुखाहार गांव निवासी अभिषेक भारद्वाज एक सामान्य परिवार से संबंध रखता है। उसके पिता ड्राइवर हैं और मां होटल में कार्य करती रही हैं। आरोपी ने 11 जून 2024 को सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट साझा की थी, जिसके बाद 28 मई 2025 को उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।


Author: Polkhol News Himachal









