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बुज़ुर्गों का छलकता दर्द… फोन में खो गई पीढ़ी, दूर हुई कहानियाँ, बात भी नहीं सुनते , टूटता संवाद

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बुज़ुर्गों का छलकता दर्द… फोन में खो गई पीढ़ी, दूर हुई कहानियाँ, बात भी नहीं सुनते , टूटता संवाद

रजनीश शर्मा। हमीरपुर 

जब शब्दों में दर्द हो और आँखों में नमी, तब समझ आता है कि समाज कहीं न कहीं अपनों से दूर हो गया है। इंटर-जनरेशन ब्रिजिंग कार्यक्रम के दौरान बुज़ुर्गों ने युवा पीढ़ी के सामने अपने मन की पीड़ा रखी—ऐसी पीड़ा, जो चुपचाप हर घर में पल रही है।


📌 “फोन पास, अपने दूर” बुज़ुर्गों की सबसे बड़ी शिकायत

बुज़ुर्गों का कहना है कि आज के बच्चे मोबाइल फोन में इतने उलझ गए हैं कि घर में रहते हुए भी वे अपनों से दूर होते जा रहे हैं।

“बातें सुनने वाला कोई नहीं, कहानियाँ सुनाने की उम्र निकल रही है।”
यह पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी का सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है।

https://youtu.be/QcZ5D08Nd6k?si=QWSDHjg5dmiz4cd2


📌  “दर्द जो पैसे से नहीं भरता”, भावनात्मक सहारे की जरूरत

बुज़ुर्गों ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें दौलत नहीं, अपनापन चाहिए
शहरों या विदेशों में बस चुके बच्चों की यादें, खाली घर और सूनी शामें—यही उनकी रोज़मर्रा की सच्चाई बन चुकी है।


📌 “जब युवाओं ने सुनी बुज़ुर्गों की आवाज़”

कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने जब बुज़ुर्गों की बातें सुनीं, तो माहौल भावुक हो उठा। युवाओं ने स्वीकार किया कि तकनीक के कारण वे अनजाने में अपनों को समय देना भूल गए हैं। यह संवाद दोनों पीढ़ियों के लिए आत्ममंथन का अवसर बना।


📌 “संस्कार और अनुभव—सबसे बड़ी विरासत”

बुज़ुर्गों ने युवाओं को बताया कि उनके जीवन के अनुभव ही समाज की असली पूंजी हैं।
अगर यह अनुभव नई पीढ़ी तक नहीं पहुँचे, तो समाज की जड़ें कमजोर हो जाती हैं।


📌  “समाधान की ओर एक कदम”

कार्यक्रम में यह संदेश उभरकर आया कि नियमित संवाद, साथ बैठकर बातचीत और समय देना ही पीढ़ियों के बीच बढ़ती खाई को पाट सकता है।


🟨 इन्फो बॉक्स

कार्यक्रम का नाम:
इंटर-जनरेशन ब्रिजिंग कार्यक्रम

मुख्य उद्देश्य:

  • बुज़ुर्गों और युवाओं के बीच संवाद बढ़ाना
  • भावनात्मक दूरी को कम करना
  • संस्कारों और अनुभवों का आदान-प्रदान

मुख्य संदेश:

“मोबाइल से बाहर निकलकर अपनों से बात करें, क्योंकि समय लौटकर नहीं आता।”

समाज के लिए सीख:

  • बुज़ुर्गों को सम्मान और समय दें
  • तकनीक का उपयोग करें, लेकिन रिश्तों की कीमत पर नहीं

निष्कर्ष

यह कार्यक्रम सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि एक चेतावनी और एक अवसर है—
चेतावनी कि अगर आज नहीं संभले, तो रिश्ते और कमजोर होंगे;
और अवसर कि संवाद से फिर से परिवार और समाज को जोड़ा जा सकता है।

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