
‘अब आए नादौन तो जाए कौन’ — ग्राम पंचायतों की पहल से धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बना नादौन
इतिहास, आस्था और विकास का संगम बन रही नादौन की पंचायतें
रजनीश शर्मा। हमीरपुर
ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के लिए प्रसिद्ध नादौन अब ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी से धार्मिक पर्यटन के एक नए मॉडल के रूप में उभर रहा है। वर्षों पुरानी कहावत ‘आए नादौन जाए कौन’ को जीवंत करते हुए पंचायतें विकास की नई इबारत लिख रही हैं।
मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में पर्यटन को नई दिशा
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में नादौन को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए कई योजनाएं धरातल पर उतरी हैं। पर्यटन विभाग द्वारा नादौन में पांच सितारा होटल और रिवर राफ्टिंग केंद्र स्थापित किया गया है, जबकि पंचायती राज एवं वन विभाग के सहयोग से हडेटा क्षेत्र में इको-टूरिज्म पार्क का निर्माण कार्य जारी है।

तालाबों और जल स्रोतों को मिला नया जीवन
विकास खंड नादौन की ग्राम पंचायतों ने ऐतिहासिक जल स्रोतों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण को प्राथमिकता दी है। इन प्रयासों से वर्षों पुराने तालाब और नौह न केवल पुनर्जीवित हुए हैं, बल्कि पर्यटन आकर्षण के रूप में भी विकसित हो रहे हैं।
पखरोल में दिव्य वैकुंठ धाम की परिकल्पना
ग्राम पंचायत गोना द्वारा पखरोल में लगभग 12 लाख रुपये की लागत से एक पुराने तालाब का जीर्णोद्धार कर भव्य पार्क बनाया गया है। यहां प्रस्तावित दिव्य वैकुंठ धाम में 14 फीट ऊंची शेषनाग पर लेटे भगवान विष्णु की प्रतिमा के साथ उनके सभी दस अवतारों की मूर्तियां स्थापित की गई हैं।
भड़वा में गूगा धाम बना आस्था का केंद्र
ग्राम पंचायत अमलेहड़ के भड़वा क्षेत्र में गूगा धाम का निर्माण पूर्ण हो गया है। यहां 20 फीट ऊंची गूगा महाराज की रथ पर सवार प्रतिमा स्थापित की गई है, जो अपने आप में एक अनूठा धार्मिक आकर्षण है।
200 साल पुराने ऐतिहासिक नौण का संरक्षण
ग्राम पंचायत जलाड़ी ने लगभग 200 वर्ष पुराने ऐतिहासिक नौण का पुनरुद्धार कर उसका सौंदर्यीकरण किया है। इससे क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ जल संरक्षण का मजबूत संदेश भी दिया गया है।

मझियार में तालाब से पार्क तक का सफर
ग्राम पंचायत मझियार भी एक पुराने तालाब को आधुनिक और सुंदर पार्क में तब्दील कर रही है, जिससे ग्रामीणों के साथ-साथ पर्यटकों को भी नया सार्वजनिक स्थल मिलेगा।
ब्यास तट पर व्यास धाम का विकास
ग्राम पंचायत चौड़ू में ब्यास नदी के तट पर स्थित पताजी पत्तन स्थल पर लगभग 12 लाख रुपये की लागत से भव्य व्यास धाम विकसित किया गया है, जो धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बन रहा है।

फास्टे में शिव भक्ति और सांस्कृतिक वैभव
ग्राम पंचायत फास्टे में पांडव युग में निर्मित श्री बिल्वकेश्वर मंदिर के समीप धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल की गई है। यहां 15 फीट ऊंचा कैलाश पर्वत का प्रतीक, 22 फीट ऊंची गंगाधर ईश्वर शिव की प्रतिमा और लगभग 40 लाख रुपये की लागत से एक भव्य पार्क स्थापित किया गया है।
मनरेगा और वित्त आयोग से मिली मजबूती
खंड विकास अधिकारी ने बताया कि ये सभी परियोजनाएं मनरेगा और वित्त आयोग के फंड के समन्वय से पूरी की गई हैं। इससे ग्रामीण स्तर पर विकास को गति मिली है।

रोजगार, पर्यटन और पहचान—तीनों को मिला लाभ
इन प्रयासों से न केवल प्राचीन जल स्रोतों का पुनर्जीवन हुआ है, बल्कि ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान भी मिली है। इससे स्थानीय युवाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और नादौन की पहचान एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित होगी।
इन्फो बॉक्स
क्षेत्र: नादौन, जिला हमीरपुर (हि.प्र.)
उद्देश्य: धार्मिक पर्यटन, जल संरक्षण, ग्रामीण विकास
प्रमुख कार्य:

- पखरोल (गोना): 12 लाख रु. से तालाब व दिव्य वैकुंठ धाम
- भड़वा (अमलेहड़): 20 फीट गूगा महाराज प्रतिमा
- जलाड़ी: 200 साल पुराने नौण का जीर्णोद्धार
- मझियार: तालाब से पार्क
- चौड़ू: ब्यास तट पर व्यास धाम
- फास्टे: 40 लाख रु. से शिव पार्क व विशाल प्रतिमाएं
फंडिंग: मनरेगा + वित्त आयोग
लाभ: रोजगार, पर्यटन वृद्धि, सांस्कृतिक संरक्षण
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Author: Polkhol News Himachal









