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शिक्षा संवाद के माध्यम से शैक्षिक जागरूकता और अध्ययन-संस्कृति को सुदृढ़ करने का आह्वान — टौणी देवी में वर्ष का सार्थक समापन

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शिक्षा संवाद के माध्यम से शैक्षिक जागरूकता और अध्ययन-संस्कृति को सुदृढ़ करने का आह्वान — टौणी देवी में वर्ष का सार्थक समापन

रजनीश शर्मा | हमीरपुर

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टौणी देवी में शिक्षा संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष का समापन विद्यार्थियों की पढ़ाई, अनुशासन एवं शैक्षणिक प्रगति को केंद्र में रखते हुए किया गया। इस अवसर पर आगामी शीतकालीन अवकाश एवं वार्षिक परीक्षाओं के दृष्टिगत घर में सकारात्मक अध्ययन-पर्यावरण तैयार करने, नियमित अध्ययन, अभिभावकीय सहयोग, मोबाइल फोन से संतुलित दूरी तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। अपने संबोधन में प्रधानाचार्य रजनीश रांगड़ा ने कहा कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक सफलता केवल विद्यालय के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए अभिभावकों की सक्रिय भूमिका और घर में अनुकूल वातावरण अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में, जहाँ लगभग 27 प्रतिशत आबादी 30 वर्ष से कम आयु की है, वहाँ बच्चों और युवाओं को सही दिशा देना देश के भविष्य को संवारने के समान है। प्रधानाचार्य ने विशेष रूप से यह स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में पढ़ाई से ध्यान भटकाने वाले अनेक कारक मौजूद हैं, जिनमें मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग और नकारात्मक संगति प्रमुख हैं। उन्होंने चेताया कि यदि समय रहते इन पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका सीधा प्रभाव बच्चों की पढ़ाई, एकाग्रता और परीक्षा परिणामों पर पड़ता है। प्रधानाचार्य ने यह भी उल्लेख किया कि प्रदेश में चिट्टे जैसे घातक नशों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जो शिक्षा से विमुखता और मानसिक अस्थिरता का बड़ा कारण बन रहा है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे छुट्टियों के दौरान बच्चों की दिनचर्या पर विशेष ध्यान दें, अध्ययन का समय सुनिश्चित करें, अनावश्यक मोबाइल उपयोग पर नियंत्रण रखें और बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाई के लिए प्रेरित करें।

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उन्होंने कहा कि बच्चों को डाँट-फटकार की बजाय संवाद, मार्गदर्शन और विश्वास के माध्यम से पढ़ाई के प्रति जागरूक बनाना अधिक प्रभावी होता है। कार्यक्रम का मंच संचालन प्रवक्ता श्री हेम लाल द्वारा प्रभावशाली ढंग से किया गया। इस अवसर पर प्रवक्ता विजय शर्मा ने भी अपने विचार रखते हुए विद्यालय-अभिभावक समन्वय को बच्चों की सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि जब विद्यालय और अभिभावक एक साझा लक्ष्य के साथ कार्य करते हैं, तभी शिक्षा अपने वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त करती है। वहीं अभिभावक सुश्री अंकिता ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों को केवल भौतिक सुविधाएँ ही नहीं, बल्कि घर में पर्याप्त समय, संवाद और भावनात्मक सहयोग मिलना चाहिए, जिससे वे मानसिक रूप से सशक्त बन सकें और पढ़ाई के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित कर सकें। शिक्षा संवाद के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि वार्षिक परीक्षाओं में अच्छे परिणाम तभी संभव हैं, जब घर का वातावरण तनावमुक्त, सहयोगात्मक और अनुशासित हो।

अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की प्रगति पर नियमित रूप से शिक्षकों से संवाद बनाए रखें और विद्यालय के साथ मिलकर कार्य करें। नववर्ष के अवसर पर विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों ने शपथ के माध्यम से नियमित अध्ययन, मोबाइल के सीमित उपयोग, अनुशासनपूर्ण दिनचर्या अपनाने और शिक्षा को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया। साथ ही समाज को नशामुक्त रखने और बच्चों को सकारात्मक दिशा देने के लिए सामूहिक प्रयास करने का भी आह्वान किया गया। इस अवसर पर चिट्टे जैसे घातक नशे के विरुद्ध कक्षा बारहवीं की छात्रा ख़ुशी द्वारा दिलाई गई शपथ के माध्यम से अध्यापकों, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों ने एकजुट होकर संकल्प लिया कि वे स्वयं नशे से दूर रहेंगे, दूसरों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेंगे तथा समाज को नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएँगे। कार्यक्रम में लगभग 70 अभिभावक, शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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