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एक साथ खेले, एक साथ पढ़े… और एक ही दिन होंगे  सेवानिवृत्त , बमसन  के दो चचेरे भाइयों की ज़िंदगी का अनोखा संयोग बना चर्चा का विषय

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एक साथ खेले, एक साथ पढ़े… और एक ही दिन होंगे  सेवानिवृत्त , बमसन  के दो चचेरे भाइयों की ज़िंदगी का अनोखा संयोग बना चर्चा का विषय

रजनीश शर्मा । हमीरपुर

कहते हैं कुछ रिश्ते किस्मत की स्याही से लिखे होते हैं—और जब संयोग साथ हो, तो कहानी मिसाल बन जाती है। विकास खंड बमसन के टौणी देवी से दो कनिष्ठ अभियंता (जेई) — जगजीत सिंह और राजेश वर्मा — बुधवार को एक साथ सेवानिवृत्त हो रहे हैं। खास बात यह कि दोनों चचेरे भाई हैं और उनकी ज़िंदगी के पड़ाव हैरान कर देने वाली समानताओं से भरे हैं।

हमीरपुर ज़िले के कंज्याण पंचायत के ढो गांव निवासी दोनों भाइयों का जन्म 9 दिसंबर 1967 को एक ही दिन हुआ। पढ़ाई भी कंधे से कंधा मिलाकर चली—पाँचवीं तक राजकीय प्राथमिक विद्यालय कंज्याण, दसवीं तक राजकीय उच्च पाठशाला परोल, फिर जमा-दो भोरंज से। आगे चलकर दोनों ने महाराष्ट्र से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी साथ-साथ पूरी की।

नौकरी की शुरुआत प्राइवेट सेक्टर से एक साथ हुई और फिर पंचायती राज विभाग में दोनों को नियुक्ति मिली। वर्षों की सेवा के बाद अब सेवानिवृत्ति भी एक ही दिन—यह संयोग कम ही देखने को मिलता है।

सेवानिवृत्ति के अवसर पर 31 दिसंबर को विकास खंड कार्यालय में सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले जिला परिषद कार्यालय, हमीरपुर में विदाई समारोह हुआ, जहाँ जिला पंचायत अधिकारी बबिता गुलेरिया सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे। इसी क्रम में ग्राम पंचायत बारीं में भी सम्मान कार्यक्रम रखा गया, जिसमें प्रधान रविंद्र ठाकुर, उपप्रधान सुमेश कुमार, सचिव सतीश, योगेश, तकनीकी सहायक अजय ठाकुर सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे। सभी ने दोनों अभियंताओं के ईमानदार और समर्पित कार्यकाल की सराहना की।


🟦 इन्फो बॉक्स

  • नाम: जगजीत सिंह व राजेश वर्मा
  • रिश्ता: चचेरे भाई
  • जन्म तिथि: 09 दिसंबर 1967 (दोनों)
  • शिक्षा:
    • प्राथमिक: राजकीय प्राथमिक विद्यालय कंज्याण
    • माध्यमिक: राजकीय उच्च पाठशाला परोल
    • जमा-दो: भोरंज
    • इंजीनियरिंग: सिविल इंजीनियरिंग, महाराष्ट्र
  • विभाग: पंचायती राज विभाग
  • पद: कनिष्ठ अभियंता (JE)
  • कार्यस्थल: विकास खंड बमसन, टौणी देवी
  • सेवानिवृत्ति: एक ही दिन
  • सम्मान समारोह:
    • जिला परिषद कार्यालय, हमीरपुर
    • ग्राम पंचायत बारीं
    • विकास खंड कार्यालय (31 दिसंबर)

यह कहानी केवल दो अभियंताओं की नहीं, बल्कि उस दुर्लभ संयोग की है जहाँ जीवन की हर सीढ़ी—जन्म से सेवा-निवृत्ति तक—साथ-साथ चढ़ी गई।

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