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नया राष्ट्रीय राजमार्ग-3 : पंजाब से लद्दाख तक 15 NH  से संपर्क, हमीरपुर-मंडी खंड सबसे चुनौतीपूर्ण

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नया राष्ट्रीय राजमार्ग-3 : पंजाब से लद्दाख तक 15 NH  से संपर्क, हमीरपुर-मंडी खंड सबसे चुनौतीपूर्ण

रजनीश शर्मा। हमीरपुर

देश की सामरिक और आर्थिक कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाला नया राष्ट्रीय राजमार्ग-3 (NH-3) पंजाब से हिमाचल होते हुए लद्दाख तक पहुंचता है। यह मार्ग न केवल पर्यटन, व्यापार और रक्षा आवागमन के लिहाज से अहम है, बल्कि पहाड़ी इलाकों में सड़क अवसंरचना की दशकों पुरानी चुनौतियों का भी समाधान प्रस्तुत करता है। स्पष्ट रहे कि यह नया NH-3 पुराने NH-3 से अलग है—पुराना NH-3 अब अस्तित्व में नहीं है और उसे अलग-अलग नए राष्ट्रीय राजमार्ग नंबरों में विभाजित किया जा चुका है।
इन प्रमुख जंक्शनों से जुड़ा है हमारा नया  NH-3
 
NH-54 – अमृतसर के पास
NH-354, NH-503A
NH-44 – जालंधर के पास
NH-703, NH-703A, NH-344B – होशियारपुर के पास
NH-503A, NH-503 – मुबारकपुर के पास
NH-303 – नादौन के निकट
NH-103 – हमीरपुर के पास
NH-305 – औट के पास
NH-505 – ग्रामफू के पास
NH-1 (टर्मिनल) – लेह के निकट
नए NH-3 का निर्माण: पुराने मार्गों का समेकन
नया NH-3 इन पुराने खंडों को जोड़कर बनाया गया है—
पुराना NH-1: अटारी से जालंधर
पुराना NH-70: जालंधर से मंडी
पुराना NH-21: मंडी से मनाली
हमीरपुर-मंडी खंड: निर्माण की असली परीक्षा
हिमाचल का हमीरपुर-मंडी खंड इस परियोजना का सबसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
मुख्य दुश्वारियां 
भू-आकृतिक चुनौतियां: तीखे मोड़, अस्थिर पहाड़ियां, भूस्खलन संभावित क्षेत्र।
भूमि अधिग्रहण: कस्बाई हिस्सों में सीमित चौड़ाई, मुआवजा व पुनर्वास से जुड़े मुद्दे।
ड्रेनेज व कटान: बरसात में जलनिकासी की कमी से कटाव का खतरा।
यातायात प्रबंधन: निर्माण के दौरान वैकल्पिक मार्गों की कमी से स्थानीय आवाजाही प्रभावित।
उभरती कमियां
कुछ हिस्सों में डिजाइन समन्वय की कमी, सर्विस रोड व क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाओं का अधूरापन।
यूटिलिटी शिफ्टिंग (बिजली, पानी, केबल) में देरी से समयसीमा प्रभावित।
सुरक्षा संकेतक और अस्थायी बैरियर पर्याप्त नहीं।

 

पूरा होने पर बड़े लाभ
यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी: हमीरपुर-मंडी के बीच तेज और सुरक्षित आवागमन।
आर्थिक संबल: कृषि-उत्पाद, लघु उद्योग और पर्यटन को नया बाजार।
रोज़गार सृजन: निर्माण व बाद की सेवाओं में स्थानीय अवसर।
आपदा प्रबंधन में मदद: एंबुलेंस, राहत सामग्री और सेना की तेज़ आवाजाही।
पर्यटन बूस्ट: मनाली-लेह कॉरिडोर से सीधा जुड़ाव, सालाना पर्यटकों की संख्या में वृद्धि।
कुल मिलाकर नया NH-3 केवल एक सड़क नहीं, बल्कि पंजाब-हिमाचल-लद्दाख को जोड़ने वाली रणनीतिक धुरी है। यदि हमीरपुर-मंडी खंड में डिज़ाइन सुधार, ड्रेनेज मज़बूती और भूमि-समन्वय को प्राथमिकता दी जाए, तो यह मार्ग क्षेत्रीय विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ा सकता है।

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