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दरब्यार में गोशाला घोटाला : “काग़ज़ों में रंभाई गायें, ज़मीन पर बने कमरे!  घोटाले में प्रधान से सचिव तक ‘दूध का हिसाब’ तलब”

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दरब्यार में गोशाला घोटाला : “काग़ज़ों में रंभाई गायें, ज़मीन पर बने कमरे!  घोटाले में प्रधान से सचिव तक ‘दूध का हिसाब’ तलब”

रजनीश शर्मा। हमीरपुर 

विकास खंड  टौणी देवी की दरब्यार पंचायत में गौ माता के नाम पर ही बड़ा घोटाला हो गया है। यहां गोशाला निर्माण का सपना इतना ऊँचा उड़ा कि गायें तो आसमान में चरती रहीं, लेकिन ज़मीन पर एक पक्का कमरा उग आया। अब जब हिसाब-किताब की बारी आई, तो दूध नहीं—सीधे रिकवरी निकल आई। वर्ष 2021-22 में गोशाला निर्माण के लिए स्वीकृत राशि ने काग़ज़ों में तो खूब सेवा दी, लेकिन हकीकत में न गोशाला दिखी, न गाय। निरीक्षण टीम जब मौके पर पहुँची तो वहाँ ‘गौ-सेवा’ की जगह ‘कमरा सेवा’ मिली। पूछने पर बताया गया—“पहले गोशाला थी, बाद में हालात बदल गए।”
जांच पूरी होते-होते घोटाले की तस्वीर साफ हो गई। अब व्यवस्था ने फरमान सुना दिया है—प्रधान से लेकर सचिव तक, तकनीकी सहायक से लेकर लाभार्थी तक—सबसे पैसे वसूले जाएंगे।
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि भुगतान नियमों के अनुसार हुआ था, लेकिन बाद में लाभार्थी ने खुद ही “रिनोवेशन” कर डाला। यानी गोशाला बनी, फिर अचानक ‘कमरे में तब्दील’ हो गई—बिना किसी सरकारी जानकारी के।
अब सवाल यह नहीं कि गोशाला क्यों नहीं बनी, सवाल यह है कि
👉 अगर सब नियमों के अनुसार था, तो रिकवरी किस बात की?
और
👉 अगर घोटाला था, तो भुगतान किसने और क्यों किया?
फिलहाल प्रशासन ने आठ लोगों से राशि वसूलने का आदेश जारी कर दिया है और पंचायत सचिव को निर्देश दिए गए हैं कि रकम मनरेगा, के खाते में जमा कराई जाए।
गाँव में लोग अब यही कह रहे हैं—
“गाय नहीं पाली, लेकिन घोटाला ज़रूर चर गया!”

📌 इन्फो बॉक्स

🔍 गोशाला घोटाला – एक नज़र में
📍 स्थान: ग्राम पंचायत दरब्यार, विकास खंड बमसन
🗓️ वर्ष: 2021-22
🐄 योजना: गोशाला निर्माण
💰 स्वीकृत राशि: ₹1 लाख
❌ हकीकत: गोशाला नहीं, पक्का कमरा मिला
👥 रिकवरी जिनसे होगी:
पंचायत प्रधान
पंचायत सचिव
तकनीकी सहायक
रोजगार सेवक
पूर्व वार्ड सदस्य
लाभार्थी सहित कुल 8 लोग
🏦 रिकवरी जमा होगी: मनरेगा, शिमला खाते में
📝 आदेश जारी: जांच पूरी होने के बाद

 

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