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हिमाचल हाई कोर्ट का सख्त रुख: पूर्व जजों  के एरियर मामले में वित्त सचिव को गुमराह करने पर दंडित करने का फैसला

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हिमाचल हाई कोर्ट का सख्त रुख: पूर्व जजों के एरियर मामले में वित्त सचिव को गुमराह करने पर दंडित करने का फैसला

पोल खोल न्यूज। शिमला 

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीशों को एरियर न देने और वित्तीय भुगतान में देरी और अदालत को गुमराह करने के मामले में वित्त सचिव को दंडित करने का निर्णय लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा कि अधिकारी द्वारा कोर्ट को घुमा-फिराकर गुमराह किया जा रहा है, जिससे उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन हो रहा है।

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अब अदालत के पास वित्त सचिव को सजा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि उन्होंने माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की है। अदालत ने यह भी कहा कि वरिष्ठ सेवानिवृत्त जजों की विधवाओं को भी एरियर से वंचित किया जा रहा है।

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मामले की सुनवाई के दौरान प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार ने अदालत में दलील दी कि बकाया भुगतान के संबंध में प्रस्ताव मंत्रिपरिषद के सामने रखा गया है और प्रशासनिक प्रक्रिया चल रही है। हालांकि कोर्ट ने इसे पहले से दिए गए बयानों के विपरीत पाया और कहा कि कोई वैध कारण नहीं है जो भुगतान में देरी को सही ठहरा सके।

इन्फो बॉक्स:

  • कोर्ट का आदेश: पूर्व न्यायाधीशों के बकाया भुगतान में देरी पर वित्त सचिव को कानूनी सजा की चेतावनी।
  • न्यायाधीशों की टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना को लेकर अदालत का कड़ा रुख।
  • अगली सुनवाई: महाधिवक्ता के निवेदन पर अगली तारीख तक सजा पर रोक, लेकिन शर्त पूरी न होने पर आदेश लागू होगा।

 

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