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हमीरपुर : वॉकथॉन की कामयाबी के बीच आम यात्री बेहाल, कई घंटों तक करते रहे बसों का इंतजार

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  • हमीरपुर : वॉकथॉन की कामयाबी के बीच आम यात्री बेहाल, कई घंटों तक करते रहे बसों का इंतजार

  • दो घंटे तक हमीरपुर बस अड्डा करता रहा बसों का इंतजार ,  बुजुर्ग–रोगी–दिव्यांग सबसे ज्यादा परेशान

रजनीश शर्मा। हमीरपुर 

हमीरपुर में चिट्टा के खिलाफ आयोजित विशाल वॉकथॉन जहां सामाजिक संदेश देने में सफल रही, वहीं इसकी कीमत आम यात्रियों को भारी परेशानी के रूप में चुकानी पड़ी। सोमवार को वॉकथॉन के चलते करीब दो घंटे तक हमीरपुर बस अड्डे में बसों की आवाजाही ठप रही। अधिकांश बसें बाईपास पर खड़ी रहीं, जबकि बस अड्डे में यात्रियों की भीड़ और बेचैनी बढ़ती गई।

धूप में बैठे एक बुजुर्ग यात्री ने बताया कि यदि उन्हें वॉकथॉन और बसों की रोक की जानकारी होती तो वे सुबह ही अपने गंतव्य के लिए निकल जाते। बरेली, अवाहदेवी, पट्टा, दिल्ली सहित विभिन्न स्थानों को जाने वाले यात्री आधे से एक घंटे से अधिक समय तक बसों का इंतजार करते रहे।

कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें वॉकथॉन की जानकारी तो थी, लेकिन यह नहीं बताया गया था कि इस दौरान बस सेवाएं भी बाधित रहेंगी। अस्पताल जाने वाले मरीजों और तीमारदारों को कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई।

करीब दोपहर 12 बजे के बाद बसें अड्डे में पहुंचनी शुरू हुईं। जैसे ही बसें आईं, यात्रियों ने राहत की सांस ली  और लोग सीट पाने के लिए दौड़ते नजर आए। वहीं अधिकांश निजी बसें अड्डे से गायब रही क्योंकि निजी स्कूलों के बच्चों को लाने और वापिस ले जाने के लिए वे पहले से ही बुक थी।


यात्रियों की जुबानी

  • सोनू (बरेली) – “45 मिनट से बस का इंतजार कर रहा हूं। दिहाड़ी लगाता हूं। वॉकथॉन का पहले पता होता तो सुबह ही निकल जाता।”
  • सीमरो देवी (अवाहदेवी) – “दवाई के लिए भोटा गई थी। वापसी में बाईपास पर उतार दिया, पैदल चलकर अड्डे पहुंची हूं। बस का कुछ पता नहीं।”
  • प्रिंस ठाकुर (पट्टा) – “कॉलेज जाना है। एक घंटा हो गया, बस नहीं दिखी।”
  • आनंद (दिल्ली) – “एनआईटी में इंटर्नशिप कर रहा हूं। 40 मिनट से बस का इंतजार है, अभी तक कोई बस नहीं मिली।”
  • विजय ( कोट ) – अनु में ही नाके पर उतार दिया। टांग में तकलीफ होने के बावजूद पैदल डीसी ऑफिस तक पहुंचना पड़ा
  • सिमरो ( लंबलू)-  दोसड़का से पैदल हॉस्पिटल चौक तक आना पड़ा। साथ में  छोटी बच्ची को भी परेशान होना पड़ा
  • रत्न चंद ( रंगस ) – पक्का भरो बाई पास में ही बस से उतार दिया। हमीरपुर बाजार तक बुजुर्ग रोगी माता के साथ पैदल आना पड़ा ।

प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर लेकिन यहां दिखी कमी

यात्रियों का कहना है कि पुलिस बटालियन की कई बसें पुलिस लाइन में खड़ी रहीं। यदि इन बसों को अनु, पक्का भरो और दोसड़का जैसे स्थानों से बुजुर्ग, रोगी और दिव्यांग यात्रियों को लाने के लिए लगाया जाता, तो हालात इतने खराब नहीं होते।


🟥 इन्फो बॉक्स

कहां: बस अड्डा हमीरपुर
कब: चिट्टा विरोधी वॉकथॉन के दौरान
समस्या:

  • करीब 2 घंटे तक बस सेवाएं प्रभावित
  • यात्रियों को पूर्व सूचना नहीं
  • मरीजों व बुजुर्गों को पैदल चलना पड़ा
    राहत:
  • दोपहर 12 बजे के बाद बसें बहाल

 


🔍 भविष्य में परेशानी से बचाव के लिए सुझाव

  1. पूर्व सूचना अनिवार्य – बड़े आयोजनों से पहले बस सेवाओं में बदलाव की सूचना मीडिया, सोशल मीडिया और बस अड्डों पर चस्पा की जाए।
  2. वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था – बुजुर्ग, रोगी और दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष बसें या शटल सेवा चलाई जाए।
  3. समन्वय व्यवस्था – पुलिस, परिवहन विभाग और जिला प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल हो।
  4. बस अड्डा संचालन आंशिक रूप से चालू – पूरी तरह बसें रोकने के बजाय सीमित रूटों पर सेवाएं जारी रखी जाएं।
  5. हेल्प डेस्क की व्यवस्था – ऐसे आयोजनों के दौरान बस अड्डे में सूचना सहायता केंद्र बनाया जाए।

कुल मिलाकर चिट्टा के खिलाफ अभियान जरूरी है, लेकिन इसके साथ यह भी उतना ही जरूरी है कि आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतों और परेशानियों को नजरअंदाज न किया जाए।

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