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चिट्टे पर CM सुक्खू सख्त, सरकार की निर्णायक पहल—उजड़ते परिवारों को बचाने के लिए पुलिस-पब्लिक तालमेल पर जोर

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चिट्टे पर CM सुक्खू सख्त, सरकार की निर्णायक पहल—उजड़ते परिवारों को बचाने के लिए पुलिस-पब्लिक तालमेल पर जोर

रजनीश शर्मा। हमीरपुर

 

हिमाचल प्रदेश में बढ़ते चिट्टा (सिंथेटिक ड्रग्स) के खतरे को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कड़ा रुख अपनाया है। हाल के घटनाक्रमों में कई युवाओं की मौत और सैकड़ों परिवारों के प्रभावित होने के बाद सरकार ने नारकोटिक्स नेटवर्क पर सर्जिकल स्ट्राइक जैसे कदम उठाते हुए एंटी-ड्रग्स अभियान को और आक्रामक रूप दिया है।

सरकार की ओर से उठाए गए प्रमुख कदम

मुख्यमंत्री सुक्खू के निर्देशों पर पुलिस और विशेष एजेंसियों ने प्रदेशभर में चिट्टा सप्लाय चेन को तोड़ने के लिए संयुक्त अभियान शुरू किया है। इंटर-स्टेट ड्रग नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाई गई है और पंजाब, हरियाणा सहित पड़ोसी राज्यों से समन्वय तेज किया गया है। सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में एंटी-ड्रग्स अवेयरनेस अभियान को अनिवार्य बनाते हुए शिक्षण संस्थानों को नोडल इकाई के रूप में जोड़ने का निर्णय लिया है। नशा नियंत्रण कोष से अतिरिक्त बजट जारी कर पुनर्वास केंद्रों की क्षमता भी बढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही नशा तस्करों की संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया को तेज करते हुए कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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चिट्टे से उजड़ते परिवार—समाज के लिए गंभीर चेतावनी

चिट्टे की गिरफ्त में आ रहे युवाओं के कारण कई परिवार मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से टूट रहे हैं। माता-पिता अपनी बचत इलाज और पुनर्वास में खर्च कर रहे हैं, जबकि कई परिवार अपने बच्चों को इस जाल से निकालने में असहाय महसूस कर रहे हैं। कई युवाओं के जीवन पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ रहा है—शिक्षा छूट रही है, रोज़गार प्रभावित हो रहा है और सामाजिक ताने-बाने में खामी आ रही है। ड्रग-रिलेटेड अपराधों में बढ़ोतरी भी चिंता का कारण बन गई है।

पुलिस-पब्लिक तालमेल जरूरी
  • विशेषज्ञों का मानना है कि चिट्टे का खात्मा केवल पुलिस कार्रवाई से संभव नहीं है। इसके लिए समाज की सामूहिक भूमिका आवश्यक है।
  • पुलिस अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया है कि स्थानीय स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी समय रहते मिलने से बड़े नेटवर्क तक पहुंचने में आसानी होती है। ग्राम कमेटियों, पंचायत प्रतिनिधियों, अभिभावकों और शिक्षकों को जागरूक किया जा रहा है ताकि वे शुरुआती संकेतों को पहचानकर समय पर हस्तक्षेप कर सकें।
  • पुलिस का मानना है कि “समाज की भागीदारी के बिना नशे के खिलाफ जंग अधूरी है। सूचना, सहयोग और जागरूकता ही इस लड़ाई के सबसे मजबूत हथियार हैं।”

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दोहराया है कि चिट्टे जैसे घातक नशे के खिलाफ सरकार किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी और युवा पीढ़ी को बचाने के लिए कठोरतम कदम उठाए जाते रहेंगे।

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