
Vijayadashami 2025 : विजयादशमी से होगा संघ शताब्दी वर्ष का शुभारम्भ…..
लेखक : नरेंदर ठाकुर (संघ विचारक)

02 अक्तूबर, 2025 से 2026 की विजयादशमी तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष मनाएगा। शताब्दी वर्ष में संघ के स्वयंसेवक पंच परिवर्तन को लेकर जनजागरण करेंगे. इनमें पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्व आधारित व्यवस्था, कुटुंब प्रबोधन तथा नागरिक कर्तव्य, इन बिंदुओं का समावेश रहेगा। शताब्दी वर्ष के दौरान व्यापक गृह संपर्क अभियान, हिन्दू सम्मेलन, प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठी और सामाजिक सद्भाव बैठकों का आयोजन किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100बर्ष पूर्ण होने जा रहे है। संघ की स्थापना 1925 विजय दशमी के दिन महाराष्ट्र में डॉक्टर केशव राव बलिराम हेडगेवार ने की थी. जिन्हे संघ में स्नेहपूर्ण डॉ साहब के नाम से भी जाना जाता है. डॉ हेडगेवार ने संघ की स्थापना की उस वक़्त चिकित्सा शिक्षा की पढ़ाई पूरी करके मात्र 35 बर्ष थी। उनके मन में बचपन से ही अंग्रेजो के खिलाफ गुलामी कि टिस थी व स्कूल समय से ही वह राष्ट्रीय भाव से ओत प्रोत हो कर देश की राष्ट्रीय एकता के लिए लग गए थे, उनमे देशभक्ति का भाव बचपन से था ।
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इसका अंदाजा यहां से भी लगा सकते है की बचपन में ही उन्होंने आपने स्कूल के ऊपरी शिखर पर भगवा झंडा अपने दोस्तों के साथ लहरा दिया, इसी कारण से अंग्रेजी प्रशासन ने उन पर नजर रखना शुरू कर दी थी, इसी कारण उन्हें पढ़ाई छोड़ कर जाना पढा. लेकिन आगे की पढ़ाई के साथ साथ वह राष्ट्रीय कांग्रेस के दल में जुड़ गए थे, परन्तु उन्होंने देखा उस वक़्त की कांग्रेस पार्टी भिन्न भिन्न समुदाय गुटों में बंटी हुयी थी।एकता का भाव देश प्रेम का भाव राष्ट्रीय कांग्रेस दल में नहीं था, इसलिए उन्होंने ऐसा संग़ठन बनाने कि सोची जो देश के लोगो का संग़ठन हो बीना जाति के भेदभाव व ऊंच नीच छोड़ एक राष्ट्रीय विचारों का संग़ठन हो इसी दूरदर्शी सोच के कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नीव रखी गयी.
नागपुर नाग समाज का केंद्र भी माना जाता है ।लेकिन संघ स्थापना से पूर्व डॉ हेडगेवार कांग्रेस व अनुशील समिति के यात्रा कर आये थे इसलिए उन्हें पता था ये राष्ट्रीय कोंग्रेस में क्या खामीया रही थी। राष्ट्रीय काग्रेस में कही न कही राष्ट्रीय विचार के प्रति समर्पण भाव कम था, इस दौरान 1925 के मध्यशील अनेको संग़ठन अंग्रेजो से मुक़्त करवाने के लिए संघर्षशील थे परन्तु भारत गुलाम क्यों हुआ उसकी वजह देश के लोगो में राष्ट्रीय भाव कही न कही न होना व अलग अलग धर्म सम्प्र्दाय ऊंच नीच में बटा होना था जो उस वक़्त आजादी के अदोलन में संगठन लगे थे वह कही न कही इन चीजों में पूरी तरह से सम्मिलित हो जाते थे इस कारण से ही डॉ हेडगेवार ने एक ऐसे संगठन का निर्माण किया जो छुआ-छुत किसी भी भेद भाव से कोसो दूर बिन किसी निजी स्वार्थ भाव से राष्ट्रीय विचारों के संग़ठन का निर्माण किया, जिसे आज 100 बर्ष पूर्ण होने जा रहे है व आज पुरे भारत बर्ष में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वर्ष का कार्य भारत के हर प्रदेश,जिला, नगर बस्ती तक पहुँच गया है ये एक मात्र एक ऐसा सामजिक संगठन है जिसने आज 40 से अधिक ऐसे संग़ठन तैयार किये है। जो देश में अलग अलग इकाई में कार्य कर रहे विद्या क्षेत्र में विद्या भारती संस्था एक बड़ा नाम बन चूका है।

सरकारी सस्थानों के बाद, सहकार भारती कोआपरेटिव क्षेत्र में एक अलग पहचान बन चुकी है। ऐसे ही Abvp विद्यार्थीयों में एक बहुत बड़ा संगठन है जो आज विश्व में सबसे बड़ा छात्र संग़ठन बन चूका है । मजदूरु संघ मजदूरो वर्ग में, धार्मिक में विहिप व अन्य और भी संगठन वट वृक्ष रुओ धारण कर चुके है। आज सामजिक गतिविधियों में देश में राष्ट्रीय विचारो के लिए कार्य कर रहे है। देश के लिए त्याग, तपस्या, बलिदान एवं बेजोड़ निस्वार्थ परिश्रम की अदभुत यात्रा के 100 वर्ष पूर्ण होने जा रहे है. आज संघ के कार्यकर्ता अनेको जगह देश सेवा में अन्य अन्य स्थानो पर कार्य कर रहा है। संघ में अनेको ऐसे कार्यकर्ता कार्य कर रहे जो सम्पूर्ण जीवन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समर्पित कर चुके है. आज संघ 100 वर्ष पूर्ण होने पर अपनी हर इकाई में शताब्दी बर्ष मनाया जा रहा है आज नई युवा पीढ़ी भी संघ से जुड़ रही है व समाज में सेवा भाव से कार्य करने की प्रेरणा ले रही है।

Author: Polkhol News Himachal









