
सियासत का बस अड्डा धर्मपुर : 13 साल में तीन बार डूब चुका, फिर भी नहीं हुआ शिफ्ट, फ्लड जोन से तुरंत हो शिफ्ट
रजनीश शर्मा। हमीरपुर
सियासत का बना बस अड्डा धर्मपुर लापरवाही की सारी हदें लांघ चुका है। इसे तुरंत यहां से शिफ्ट करने की जरूरत अब कांग्रेस के साथ साथ भाजपा भी महसूस करने लग पड़ी है। मंगलवार को जिला मंडी के धर्मपुर बस अड्डे को एक बार फिर आपदा का सामना करना पड़ा है। अस्तित्व में आने के 13 साल के अंदर धर्मपुर बस अड्डे को बार-बार बाढ़ का दंश झेलना पड़ रहा है। बावजूद इसे अन्य किसी सुरक्षित स्थान पर करने की कवायद शुरू नहीं हो पाई है। वहीं, अब सरकार ने निर्णय लिया है कि यहां से बस अड्डे को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट कर दिया जाएगा।

सितंबर 2012 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बस अड्डे का उद्घाटन किया गया था। बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में ग्राउंड फ्लोर के निर्माण का कार्य पूरा किया। सोन खड्ड के साथ सटे होने के कारण बारिश में यह बस अड्डा अकसर डूब जाता है। बस अड्डे के धरातल में दुकानों का निर्माण किया गया है। दूसरी मंजिल में परिवहन निगम कार्यालय की विभिन्न शाखाएं हैं। सबसे ऊपरी मंजिल में चालकों और परिचालकों के विश्राम के लिए कमरे हैं।

सोमवार और मंगलवार की रात सोन खड्ड के रौद्र रूप के कारण बस अड्डे की धरातल की मंजिल पूरी तरह जलमग्न हो गई। पानी का बहाव देख कर विश्राम कर रहे चालकों-परिचालकों में अफरातफरी मच गई।
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करीब दो घंटे तक चालकों-परिचालकों की सांसें अटकी रहीं। पानी का बहाव कम होने के बाद उनकी जान में जान आई। धर्मपुर बस अड्डे में इससे पहले साल 2015 में भी इसी तरह का मंजर रहा है। उस दौरान भी खड्ड के पानी में बस अड्डे की पहली मंजिल डूब गई थी। इसके बाद 2023 में भी कुछ इसी तरह का हाल रहा। बाढ़ के कारण करोड़ों की बसों समेत अन्य संसाधनों का नुकसान हुआ है। इस बार नुकसान करोड़ों का हुआ।

करीब सौ दुकानें बस अड्डे और इसके आसपास की बर्बाद हुई। करीब दो दर्जन HRTC की बसें क्षतिग्रस्त हो गई। लगभग 50 निजी स्कूटरियां, बाइक्स और कारें सोन खड्ड में बह गई। अब राहत के नाम पर दुकानदारों को अभी तक दस दस हजार रुपए ही मिल पाए हैं। फ्लड जोन से सौ मीटर दूरी तक भवन न होने की शर्त सख्ती से अगर लागू करनी है तो सबसे पहले यह शर्त धर्मपुर से ही लागू हो ताकि फिर सोन खड्ड करोड़ों की चपत न लगा सके।



Author: Polkhol News Himachal









