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छह महीने की तलाश बेकार, बैंकों में पड़े 307 करोड़ के मालिकों का कोई पता नहीं

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छह महीने की तलाश बेकार, बैंकों में पड़े 307 करोड़ के मालिकों का कोई पता नहीं

पोल खोल न्यूज़ शिमला।

प्रदेश में करोड़ों रुपये ऐसे बैंक खातों में पड़े हैं, जिनके मालिकों को खुद अपनी जमा पूंजी का पता नहीं है। लाखों परिवार अपनी बैंक जमा राशि से अनजान हैं। बैंकिंग तंत्र भी वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच बनाने में सफल नहीं हो पा रहा है।
हिमाचल प्रदेश के बैंकों में जमा 307 करोड़ रुपये से अधिक की राशि छह महीने तक चले विशेष अभियान के बाद भी अपने असली हकदारों तक नहीं पहुंच सकी है। प्रदेश में करोड़ों रुपये ऐसे बैंक खातों में पड़े हैं, जिनके मालिकों को खुद अपनी जमा पूंजी का पता नहीं है। लाखों परिवार अपनी बैंक जमा राशि से अनजान हैं। बैंकिंग तंत्र भी वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच बनाने में सफल नहीं हो पा रहा है। वित्तीय सेवा विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक के संयुक्त प्रयासों के बावजूद हिमाचल में 10.67 लाख से अधिक निष्क्रिय और अनक्लेम्ड बैंक खातों के मालिकों का पता नहीं चल पाया है।

10,082 खातों के दावों का निपटारा हो सका
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के आंकड़े बताते हैं कि 31 अगस्त 2025 तक प्रदेश के विभिन्न बैंकों में 10,77,428 अनक्लेम्ड खाते दर्ज थे, जिनमें 333.63 करोड़ रुपये जमा थे। खाताधारकों और उनके उत्तराधिकारियों की तलाश के लिए एक अक्तूबर 2025 से विशेष अभियान शुरू किया गया, लेकिन छह महीने बाद भी तस्वीर बहुत अधिक नहीं बदली। 31 मार्च 2026 तक केवल 10,082 खातों का ही निपटारा हो सका और 26.49 करोड़ रुपये वास्तविक दावेदारों को लौटाए गए। कुल राशि का बड़ा हिस्सा, 307 करोड़ रुपये अब भी बैंकों में फंसा हुआ है।
वित्तीय जागरूकता और उत्तराधिकार प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल
यह स्थिति न केवल बैंकिंग व्यवस्था बल्कि वित्तीय जागरूकता और उत्तराधिकार प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है। बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी संख्या में ऐसे खाते लंबे समय से निष्क्रिय हैं। कई खाताधारकों का पता बदल चुका है, कुछ की मृत्यु हो चुकी है और उनके परिवारों को खातों या सावधि जमाओं की जानकारी तक नहीं है। यही वजह है कि व्यापक अभियान के बावजूद अनक्लेम्ड राशि का बड़ा हिस्सा अभी भी बैंकों में फंसा हुआ है। जिलावार आंकड़ों में कांगड़ा सबसे ऊपर है, जहां 2.25 लाख से अधिक अनक्लेम्ड खातों में 74.49 करोड़ रुपये जमा थे। कांगड़ा में चले अभियान के तहत 2616 खातों में 5.21 करोड़ रुपये लौटाए गए हैं।
जिलेवार स्थिति (31 अगस्त 2025 तक)
जिला खातों की संख्या जमा राशि (करोड़ रुपये)
कांगड़ा 2,25,602 74.49
शिमला 1,35,398 58.08
सोलन 1,41,154 42.08
मंडी 1,38,176 31.87
ऊना 93,814 25.98
हमीरपुर 82,368 21.08
कुल्लू 90,523 20.78
सिरमौर 59,753 19.83
चंबा 43,692 15.19
बिलासपुर 46,784 14.02
किन्नौर 13,355 5.33
लाहौल-स्पीति 6,809 4.90

रिटेल खातों में फंसा है सबसे अधिक पैसा
एसएलबीसी की रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक पैसा आम लोगों के रिटेल खातों में फंसा हुआ है। प्रदेश में 10.50 लाख रिटेल खातों में 292.35 करोड़ रुपये जमा हैं। वहीं संस्थागत खातों में 23.71 करोड़ रुपये और केंद्र व राज्य सरकार से जुड़े खातों में 17.57 करोड़ रुपये अनक्लेम्ड पड़े हैं। विशेष अभियान के दौरान भी सबसे अधिक 13.89 करोड़ रुपये रिटेल खातों से संबंधित दावों का निपटारा हुआ।

बैंक शाखाओं को दिए गए निर्देश
वित्तीय सेवा विभाग ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे खातों की पहचान कर खाताधारकों या उनके उत्तराधिकारियों से संपर्क करें। जिन लोगों के परिवार के किसी सदस्य के पुराने बैंक खाते, सावधि जमा (एफडी) या निष्क्रिय खाते हैं, वे बैंक शाखा अथवा आरबीआई के पोर्टल पर जानकारी लेकर दावा प्रस्तुत कर सकते हैं।
बैंक खातों के री-केवाईसी की गति भी धीमी
प्रदेश में बैंक खातों के री-केवाईसी की गति भी धीमी है। पांच जून तक सिर्फ 37.66 फीसदी खातों की ही री-केवाईसी हो सकी है। 14.81 लाख खातों को री-केवाईसी के लिए चुना गया था। इनमें से 5.58 लाख खातों की री-केवाईसी हो चुकी है, जबकि 9.23 लाख खातों की प्रक्रिया को अभी पूरा किया जाना शेष है।

 

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