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तकनीकी शिक्षा विभाग में प्रमोशन कोटा खत्म करने के फैसले पर सरकार से जवाब तलब

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तकनीकी शिक्षा विभाग में प्रमोशन कोटा खत्म करने के फैसले पर सरकार से जवाब तलब

पोल खोल न्यूज़ शिमला।

तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग में काडर पुनर्गठन और प्रमोशन कोटा खत्म करने पर विवाद खड़ा हो गया है।

हिमाचल प्रदेश के तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग में काडर पुनर्गठन और प्रमोशन कोटा खत्म करने पर विवाद खड़ा हो गया है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी (असिस्टेंट डायरेक्टर) ने राज्य सरकार द्वारा जारी एक हालिया अधिसूचना को प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले में प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई अब 6 अगस्त को होगी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि सरकार का यह कदम मनमाना, असांविधानिक और महानिदेशालय प्रशिक्षण (डीजीटी) केंद्र के स्थापित नियमों के खिलाफ है।

याचिका में बताया गया है कि सरकार ने 10 दिसंबर 2025 को अधिसूचना जारी की थी। अधिसूचना के तहत असिस्टेंट डायरेक्टर (ट्रेनिंग) के दो मौजूदा पदों को री-डेजिग्नेट (नया नाम) करके असिस्टेंट डायरेक्टर (इंडस्ट्रियल एंड वोकेशनल ट्रेनिंग) और असिस्टेंट डायरेक्टर (एंटरप्रेन्योरियल डेवलपमेंट) बना दिया गया है। अब इन पदों को 100 फीसदी सीधी भर्ती से भरने का फैसला लिया गया है, जिससे वर्षों से सेवा दे रहे ग्रुप इंस्ट्रक्टर्स और प्रिंसिपल्स का 50 फीसदी प्रमोशन कोटा खत्म हो गया है। डिप्टी डायरेक्टर (ट्रेनिंग) के तीन पदों में से केवल एक बरकरार रखा गया, जबकि बाकी दो पद नए सृजित काडर के लिए डायवर्ट कर दिए।

याचिकाकर्ता ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में डिग्री धारक हैं और साल 2018 से प्रिंसिपल व बाद में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने याचिका में कहा कि वर्ष 2014 के आरएंडपी नियमों के मुताबिक इन पदों पर 50 फीसदी भर्ती विभागीय पदोन्नति और 50 फीसदी सीधी भर्ती से होनी चाहिए। प्रदेश में 136 आईटीआई प्रिंसिपल्स हैं, जिनके लिए आगे प्रमोशन के मात्र 6 पद (5 सीनियर स्केल प्रिंसिपल और 1 डिप्टी डायरेक्टर) उपलब्ध हैं। प्रमोशन के अवसर पहले ही 5 फीसदी से कम हैं। कई अधिकारी 20 से अधिक वर्षों से एक ही पद पर बिना एश्योर्ड कॅरियर प्रोग्रेशन के काम कर रहे हैं।

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