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हिमाचल बोर्ड के सर्टिफिकेट पर अब क्यूआर कोड, सेकंडों में होगी वेरिफिकेशन

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हिमाचल बोर्ड के सर्टिफिकेट पर अब क्यूआर कोड, सेकंडों में होगी वेरिफिकेशन

पोल खोल न्यूज़ । धर्मशाला 

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए बड़ी डिजिटल पहल करने का फैसला लिया है। अब बोर्ड पहली बार सर्टिफिकेट पर क्यूआर कोड अंकित करेगा, जिससे छात्रों का पूरा एकेडमिक रिकॉर्ड तुरंत ऑनलाइन देखा जा सकेगा।

नई व्यवस्था के तहत जैसे ही कोई कॉलेज, यूनिवर्सिटी या सरकारी विभाग सर्टिफिकेट पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करेगा, परीक्षार्थी की जानकारी सीधे बोर्ड के आधिकारिक डिजिटल डाटाबेस से सामने आ जाएगी। इससे सर्टिफिकेट की सत्यता जांचने की प्रक्रिया बेहद आसान और तेज हो जाएगी।

बोर्ड की योजना के अनुसार यह सुविधा सत्र 2025-26 से जारी होने वाले सभी सर्टिफिकेट में अनिवार्य रूप से लागू की जाएगी। अब तक वेरिफिकेशन के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, लेकिन क्यूआर कोड के जरिए कुछ ही सेकंड में प्रमाणिकता सुनिश्चित हो सकेगी।

फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम

इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि फर्जी सर्टिफिकेट और मार्कशीट पर काफी हद तक रोक लगेगी। चूंकि हर सर्टिफिकेट सीधे डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़ा होगा, इसलिए उसमें छेड़छाड़ करना या नकली दस्तावेज बनाना मुश्किल हो जाएगा।

विद्यार्थियों को मिलेगा सीधा लाभ

यह सुविधा खासतौर पर उन छात्रों के लिए फायदेमंद होगी जो उच्च शिक्षा, सरकारी नौकरी या विदेश में पढ़ाई के लिए आवेदन करते हैं। अब उन्हें दस्तावेज सत्यापन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

इस वर्ष 10वीं के 93,564 और 12वीं के 81,411—कुल 1,74,975 विद्यार्थियों के सर्टिफिकेट इस डिजिटल सुरक्षा कवच के दायरे में आएंगे।

बोर्ड के सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा के अनुसार इस नई तकनीक को पूरी तरह सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए आधुनिक डिजिटल सिक्योरिटी मानकों का उपयोग किया जाएगा।

मुख्य फायदे:

  • फर्जी मार्कशीट पर रोक
  • एडमिशन में तुरंत वेरिफिकेशन
  • नौकरी में फर्जी दस्तावेजों की पहचान आसान
  • रिकॉर्ड में छेड़छाड़ मुश्किल
  • विद्यार्थियों का डाटा सुरक्षित

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