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पंचायत चुनाव में सख्ती: गलत जानकारी देने पर 6 साल का बैन बरकरार

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पंचायत चुनाव में सख्ती: गलत जानकारी देने पर 6 साल का बैन बरकरार

हाईकोर्ट ने कहा—नामांकन में पारदर्शिता अनिवार्य, मतदाता का अधिकार सर्वोपरि

पोल खोल न्यूज़ | शिमला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायती राज चुनावों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि नामांकन पत्र भरते समय यदि कोई उम्मीदवार अपने आपराधिक रिकॉर्ड या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छिपाता है, तो उसे 6 साल तक चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करना पूरी तरह संवैधानिक और उचित है।

धारा 146(2) को मिली संवैधानिक मान्यता

कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 146(2) को वैध ठहराते हुए संबंधित याचिका खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में ईमानदारी पहली शर्त है।

“मतदाता को जानने का पूरा अधिकार”

अदालत ने साफ कहा कि मतदाता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वह जिस उम्मीदवार को चुन रहा है, उसका पिछला रिकॉर्ड क्या है।
जानकारी छिपाना सीधे तौर पर मतदाता के अधिकारों का उल्लंघन है।

6 साल की सजा क्यों सही?

याचिकाकर्ता ने 6 साल की पाबंदी को अत्यधिक बताया, लेकिन कोर्ट ने इसे तार्किक ठहराया।

  • पंचायत चुनाव हर 5 साल में होते हैं
  • अगर सजा 5 साल से कम होगी, तो दोषी अगला चुनाव लड़ सकता है
  • इसलिए सजा ऐसी होनी चाहिए कि कम से कम एक चुनाव चक्र छूटे

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बाद में किसी केस में बरी हो जाना इस सजा को खत्म नहीं करता, क्योंकि सजा अपराध के लिए नहीं बल्कि झूठी घोषणा के लिए दी जाती है


मंडी के पांगणा पंचायत से जुड़ा मामला

यह मामला पांगणा ग्राम पंचायत (जिला मंडी) के पूर्व प्रधान से संबंधित है।

  • नवंबर 2020 में प्रधान चुने गए
  • आरोप: नामांकन के समय लंबित आपराधिक केस की जानकारी छिपाई
  • उपायुक्त मंडी ने चुनाव रद्द कर 6 साल के लिए अयोग्य ठहराया

  • हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन याचिका खारिज

रोस्टर विवाद पर भी हाईकोर्ट सख्त

पंचायती राज चुनावों में आरक्षण रोस्टर को लेकर भी कई याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर हुई हैं।
अदालत ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
इन सभी मामलों पर अब 20 अप्रैल को एक साथ सुनवाई होगी।


🧾 इन्फो बॉक्स

  • फैसला देने वाली अदालत: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
  • मुख्य मुद्दा: नामांकन में गलत जानकारी / तथ्य छिपाना
  • सजा: 6 साल तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध
  • कानून: पंचायती राज अधिनियम 1994, धारा 146(2)
  • मुख्य संदेश: चुनाव में पारदर्शिता और ईमानदारी अनिवार्य
  • अगली सुनवाई (रोस्टर केस): 20 अप्रैल

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