
चेस्टर हिल्स मामले में रेरा की कार्यप्रणाली पर सवाल, बिना जांच JDA को दी मंजूरी
पोल खोल न्यूज़। सोलन

हिमाचल प्रदेश के चर्चित चेस्टर हिल्स प्रोजेक्ट मामले में रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि रेरा ने बिना गहन जांच के कृषक और बिल्डर के बीच हुए जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (JDA) को मंजूरी दे दी थी। यह एग्रीमेंट जून 2022 में रेरा में पंजीकृत किया गया था, जिसमें प्रोजेक्ट को तीन साल में पूरा करने की शर्त भी दर्ज थी। इसका खुलासा एसडीएम की जांच रिपोर्ट में हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, जब 2024 में मामला सार्वजनिक हुआ और कानूनी पेचीदगियां सामने आईं, तो बिल्डर और संबंधित कृषकों ने जनवरी 2025 में तय समय से पहले ही एग्रीमेंट तोड़ दिया।
अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या रेरा ने मंजूरी देने से पहले दस्तावेजों और जमीनी हकीकत की सही जांच की थी या नहीं।

⚖️ अगली सुनवाई
इस मामले में 23 अप्रैल को अदालत में अहम सुनवाई होगी, जिसमें:
- धारा 118 के उल्लंघन
- बेनामी संपत्ति के आरोप
- एग्रीमेंट की शर्तों की वैधता
जैसे मुद्दों पर जवाब तलब किया जाएगा।
उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा के अनुसार, एग्रीमेंट समय से पहले क्यों तोड़ा गया और किन शर्तों पर पंजीकरण हुआ—इसकी भी जांच की जाएगी।
📌 इन्फो बॉक्स
- 📍 मामला: चेस्टर हिल्स प्रोजेक्ट, सोलन
- 📅 JDA पंजीकरण: जून 2022
- ⏳ प्रोजेक्ट अवधि: 3 साल
- ❌ एग्रीमेंट समाप्त: जनवरी 2025 (समय से पहले)
- ⚠️ आरोप: बिना जांच मंजूरी, धारा 118 उल्लंघन
- 📆 अगली सुनवाई: 23 अप्रैल
Author: Polkhol News Himachal









