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एक घटना नहीं, वर्षों की निस्वार्थ सेवा भी देखिए — डॉ. सुरेंद्र सिंह डोगरा

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एक घटना नहीं, वर्षों की निस्वार्थ सेवा भी देखिए — डॉ. सुरेंद्र सिंह डोगरा

संजय लगवाल  ऊहल

हमीरपुर मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष एवं हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ के राज्य उपाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र सिंह डोगरा ने कहा कि किसी भी चिकित्सक का मूल्यांकन एक घटना, अधूरी जानकारी अथवा सोशल मीडिया पर चल रहे अभियानों के आधार पर नहीं, बल्कि उसके वर्षों के समर्पण, सेवा और कार्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत डॉ. अनु ने अपने सेवाकाल में चिकित्सा सेवा की ऐसी मिसाल प्रस्तुत की है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। जून 2011 से जून 2017 तथा जून 2021 से जून 2026 तक अपने दोनों कार्यकालों में उन्होंने 1,969 सफल सी-सेक्शन किए। इन सभी ऑपरेशनों के दौरान मातृ मृत्यु का आंकड़ा शून्य रहा, जो उनकी दक्षता, अनुभव और समर्पण का सशक्त प्रमाण है। उनके मार्गदर्शन में 20,000 से अधिक सुरक्षित सामान्य प्रसव भी सफलतापूर्वक संपन्न हुए। अनेक जटिल ऑपरेशन, जिनके लिए सामान्यतः मरीजों को बड़े चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया जाता था, उन्होंने क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में ही सफलतापूर्वक किए, जिससे हजारों परिवारों को आर्थिक, मानसिक और सामाजिक राहत मिली।
डॉ. डोगरा ने कहा कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज के सोशल मीडिया युग में किसी भी डॉक्टर की वर्षों की कमाई हुई प्रतिष्ठा को कुछ मिनटों में कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है। एक चिकित्सक अपनी पूरी सेवा-यात्रा में हजारों लोगों को नया जीवन देता है, लेकिन यदि किसी एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद बिना तथ्यों, बिना विशेषज्ञ जांच और बिना पूरी जानकारी के उसके विरुद्ध जनमत तैयार किया जाए, तो यह न केवल उस चिकित्सक के साथ अन्याय है बल्कि पूरे चिकित्सा समुदाय का मनोबल भी तोड़ता है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान कोई गणितीय सूत्र नहीं है, जहाँ हर परिस्थिति का परिणाम एक जैसा हो। डॉक्टर अपनी पूरी निष्ठा, ज्ञान और अनुभव के साथ प्रत्येक मरीज को बचाने का प्रयास करते हैं, लेकिन कई बार परिस्थितियाँ चिकित्सा की सीमाओं से भी आगे होती हैं। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच से पहले किसी चिकित्सक को दोषी ठहराना न्याय और संवेदनशीलता—दोनों के विरुद्ध है।
डॉ. डोगरा ने समाज, जनप्रतिनिधियों और मीडिया से आग्रह किया कि वे चिकित्सकों के वर्षों के योगदान, उनके त्याग और उनके मानवीय पक्ष को भी उतनी ही गंभीरता से देखें, जितनी किसी विवाद को देखते हैं। यदि हम अपने समर्पित और ईमानदार चिकित्सकों का मनोबल निराधार आरोपों और सोशल मीडिया ट्रायल से गिराते रहेंगे, तो भविष्य में कठिन एवं जटिल मामलों को संभालने का साहस भी प्रभावित होगा, जिसका सीधा असर आम जनता की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि समाज और चिकित्सकों का संबंध विश्वास पर आधारित है। इस विश्वास को कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत करने की आवश्यकता है। वर्षों की निस्वार्थ सेवा, हजारों सुरक्षित उपचार और अनगिनत बचाई गई जिंदगियों को कभी भी क्षणिक भावनाओं या सोशल मीडिया के शोर में भुलाया नहीं जाना चाहिए।

 

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