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सड़कों की बदहाल स्थिति पर हाईकोर्ट सख्त, अधिकारियों को तलब; कई अहम मामलों में दिए निर्देश

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सड़कों की बदहाल स्थिति पर हाईकोर्ट सख्त, अधिकारियों को तलब; कई अहम मामलों में दिए निर्देश

पोल खोल न्यूज़ डेस्क । शिमला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों, खासकर शिमला-ठियोग-नारकंडा हाईवे की खराब हालत पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “ये सड़कें हैं या धूल के गुबार।” खराब सड़कों से वाहनों को नुकसान के साथ-साथ उड़ती धूल से पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।

अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे ढली से नारकंडा तक सड़क को दुरुस्त करने का स्पष्ट रोडमैप पेश करें। अब इस जनहित याचिका का दायरा बढ़ाते हुए ठियोग से नारकंडा तक का हिस्सा भी शामिल कर लिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 21 मई को होगी। रिपोर्ट के अनुसार फागू के पास 2-3 किलोमीटर सड़क अब भी बेहद खराब स्थिति में है।

खंडपीठ ने कहा कि देरी से की गई मरम्मत के कारण सड़क की निचली परतें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिससे हालिया कार्य के टिकाऊ होने की संभावना कम है। पूरी सड़क के पुनर्निर्माण की सिफारिश भी की गई है। अदालत ने राज्य सरकार के सुस्त रवैये को देरी का कारण बताया।

पर्यटन और एप्पल बेल्ट पर असर

अदालत ने कहा कि यह राजमार्ग राज्य की एप्पल बेल्ट की जीवनरेखा है और किन्नौर से लेकर भारत-चीन सीमा क्षेत्रों को जोड़ता है। खराब सड़कों के कारण पर्यटन और बागवानी दोनों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। साथ ही एचआरटीसी को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि बसों में टूट-फूट बढ़ रही है।

केंद्र ने राज्य पर डाली जिम्मेदारी

केंद्र सरकार ने अदालत में हलफनामा दायर कर कहा कि वह राजमार्गों की बहाली के लिए धन देने को तैयार है, लेकिन राज्य लोक निर्माण विभाग की ओर से प्रस्ताव भेजने में देरी हुई है। कोर्ट ने इसे लापरवाही करार दिया।

केसीसी बैंक मामला: पूर्व सैनिकों को पे प्रोटेक्शन का लाभ

हाईकोर्ट ने कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक को आदेश दिया कि पूर्व सैनिक कर्मचारियों को भी पे प्रोटेक्शन का लाभ दिया जाए। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने कहा कि समान स्थिति वाले कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ता 2008 से अपने हक के लिए लड़ रहे थे और उन्हें सभी बकाया वित्तीय लाभ भी देने के निर्देश दिए गए हैं।

कांस्टेबल पदोन्नति मामला

हाईकोर्ट ने पुलिस कांस्टेबलों की पदोन्नति से जुड़े मामले में राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस कर्मियों के सेवा हितों की रक्षा और समयबद्ध पदोन्नति सुनिश्चित करना जरूरी है।

📌 इन्फो बॉक्स 

👉 शिमला-ठियोग-नारकंडा हाईवे की खराब हालत पर हाईकोर्ट सख्त

👉 अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत पेश होने के आदेश

👉 21 मई को अगली सुनवाई

👉 फागू के पास 2-3 किमी सड़क अब भी खराब

👉 पर्यटन और एप्पल बेल्ट पर पड़ा असर

👉 केंद्र ने कहा—धन देने को तैयार, राज्य ने प्रस्ताव भेजने में की देरी

👉 केसीसी बैंक को पूर्व सैनिकों को पे प्रोटेक्शन देने का आदेश

👉 पुलिस कांस्टेबल पदोन्नति मामले में सरकार की अपील खारिज

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