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बीबीएन में श्रमिकों की भारी कमी, उद्योगों पर मंडराया संकट

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🔴 बीबीएन में श्रमिकों की भारी कमी, उद्योगों पर मंडराया संकट

पोल खोल न्यूज़ । बद्दी/ सोलन

हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) में श्रमिकों की भारी किल्लत का असर अब साफ तौर पर उद्योगों पर दिखने लगा है। हजारों इकाइयों में उत्पादन प्रभावित हो रहा है और कई जगह रोजाना संचालन तक बाधित होने लगा है।

👉 मजदूरों की तलाश में भटक रहे उद्योगपति

उद्योगपतियों के अनुसार हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि लेबर चौक से लेकर गली-मोहल्लों तक मजदूरों की तलाश की जा रही है। श्रमिकों को आकर्षित करने के लिए 8 घंटे की दिहाड़ी बढ़ाकर ₹800 से ₹900 तक कर दी गई है और भोजन की सुविधा भी दी जा रही है, इसके बावजूद पर्याप्त मजदूर नहीं मिल रहे।

👉 क्यों पैदा हुआ संकट?

ठेकेदारों का कहना है कि गेहूं कटाई के सीजन और गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों के चलते बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने राज्यों को लौट गए हैं, जिससे यह स्थिति बनी है।

👉 उत्पादन आधा होने का खतरा

उद्योगपतियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो उत्पादन घटकर आधा रह सकता है। इसका सीधा असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

👉 उद्योग पहले से ही दबाव में

बीबीएन के उद्योग पहले ही कई चुनौतियों का सामना कर रहे थे, ऐसे में श्रमिक संकट ने स्थिति और गंभीर बना दी है।

👉 उद्योग संगठनों की मांग

  • चिरंजीवी ठाकुर (राज्याध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ इंडिया) का कहना है कि यदि श्रमिकों की वापसी और उन्हें टिकाने के लिए नीति नहीं बनी, तो आने वाले महीनों में उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होगा।
  • अशोक राणा (अध्यक्ष, लघु उद्योग संघ) ने कहा कि छोटे और मझोले उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं और सरकार को विशेष श्रमिक प्रोत्साहन योजना लानी चाहिए।
  • संजीव शर्मा (वरिष्ठ उपाध्यक्ष, लघु उद्योग भारती) के अनुसार श्रमिकों की वापसी, रेंटल आवास नीति और मूलभूत सुविधाओं में सुधार बेहद जरूरी है, नहीं तो कई इकाइयों में मशीनें बंद करनी पड़ सकती हैं।

📦 इन्फो बॉक्स

क्षेत्र: बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन)
समस्या: श्रमिकों की भारी कमी
दिहाड़ी: ₹800–₹900 + भोजन
मुख्य कारण:

  • गेहूं कटाई सीजन
  • प्रवासी मजदूरों की वापसी
  • महंगाई (गैस सिलेंडर)
    असर:
  • उत्पादन प्रभावित
  • संचालन में दिक्कत
  • मशीनें बंद होने का खतरा
    मांग:
  • स्थायी श्रमिक नीति
  • श्रमिक प्रोत्साहन योजना
  • आवास व मूलभूत सुविधाओं में सुधार

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