
🛰️ घेपन झील पर पहली बार अर्ली वार्निंग सिस्टम, आपदा से पहले मिलेगी चेतावनी
पोल खोल न्यूज़ । लाहौल स्पीति

लाहौल घाटी की संवेदनशील घेपन झील की सुरक्षा को लेकर बुधवार को राष्ट्रीय स्तर पर अहम पहल की गई। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की टीम लाहौल पहुंची और सिस्सू में जिला प्रशासन के साथ बैठक कर आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।

हिमाचल प्रदेश में पहली बार किसी ग्लेशियर झील पर अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। यह पायलट प्रोजेक्ट सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत शुरू किया जा रहा है। इस परियोजना में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, केंद्रीय जल आयोग और लाहौल-स्पीति प्रशासन मिलकर काम करेंगे।

एनडीएमए के सचिव मनीष भारद्वाज और सदस्य डॉ. दिनेश कुमार असवाल सिस्सू पहुंचे, जहां उन्होंने उपायुक्त किरण भड़ाना और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की। बर्फबारी के कारण फिलहाल झील तक पहुंच संभव नहीं होने से बैठक सिस्सू में ही आयोजित की गई।
उपायुक्त ने बताया कि प्रस्तावित अत्याधुनिक सिस्टम झील में हिमखंड टूटने या जलस्तर बढ़ने की स्थिति में पहले ही खतरे का संकेत देगा। इससे ग्लेशियर झील फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं से समय रहते निपटने में मदद मिलेगी।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा संभावित खतरे वाली ग्लेशियर झीलों की सूची में घेपन झील भी शामिल है। यह झील समुद्र तल से करीब 13,615 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और इसकी गहराई 100 मीटर से अधिक आंकी गई है। जलवायु परिवर्तन और बर्फ के पिघलने के कारण इसका आकार लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि झील फटती है तो इसका पानी सीधे चंद्रा नदी में जाएगा, जिससे लाहौल के कई गांवों के साथ-साथ मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग और अटल टनल मार्ग को भी भारी नुकसान हो सकता है। प्रशासन के मुताबिक जल्द ही यहां हिमाचल का पहला सैटेलाइट आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा, जो मौसम विभाग और प्रशासन को पहले ही अलर्ट जारी करेगा।

📊 इन्फो बॉक्स
📍 स्थान: घेपन झील, लाहौल घाटी
🏔️ ऊंचाई: लगभग 13,615 फीट
🌊 गहराई: 100 मीटर से अधिक
⚠️ खतरा: ग्लेशियर झील फटना, अचानक बाढ़
🛰️ पहल: हिमाचल का पहला सैटेलाइट आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम
🤝 संस्थाएं: एनडीएमए, C-DAC, केंद्रीय जल आयोग, ISRO, जिला प्रशासन
🚧 संभावित असर: चंद्रा नदी, गांव, मनाली-लेह हाईवे, अटल टनल मार्ग
Author: Polkhol News Himachal








