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सीनियर को जूनियर से कम वेतन नहीं: हाईकोर्ट सख्त, ‘स्टेप-अप पे’ देने के आदेश

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सीनियर को जूनियर से कम वेतन नहीं: हाईकोर्ट सख्त, ‘स्टेप-अप पे’ देने के आदेश

पोल खोल न्यूज़ । शिमला 

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी विभाग में वरिष्ठ कर्मचारी को अपने कनिष्ठ से कम वेतन नहीं दिया जा सकता।

न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की एकल पीठ ने सरकार को आदेश दिए हैं कि याचिकाकर्ता को उनके जूनियर के बराबर वेतनमान (स्टेप-अप पे) दिया जाए। अदालत ने कहा कि भले ही जूनियर पहले प्रमोट हो गए हों, लेकिन जब सीनियर भी उसी कैडर में पदोन्नत हो जाता है, तो उसकी वरिष्ठता बहाल हो जाती है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि वेतन में ऐसी विसंगति उत्पन्न होती है, तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वरिष्ठ कर्मचारी का वेतन बढ़ाकर जूनियर के बराबर किया जाए। अदालत ने फंडामेंटल रूल्स (FR-22) और 16 मार्च 2012 के उस आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता की मांग खारिज की गई थी।

अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को यह लाभ काल्पनिक आधार पर और याचिका दायर करने से तीन वर्ष पूर्व से वास्तविक आधार पर दिया जाए। यदि तीन महीने के भीतर एरियर का भुगतान नहीं किया गया, तो विभाग को 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

मामले में याचिकाकर्ता 1961 में वन परिक्षेत्राधिकारी के रूप में भर्ती हुए थे और वरिष्ठता सूची में ऊपर होने के बावजूद उनके जूनियर को पहले पदोन्नति मिलने से वेतन में असमानता पैदा हो गई थी।

ब्रूअरी लाइसेंस मामला:

हाईकोर्ट ने सिरमौर के कालाअंब स्थित तिलोक संस ब्रूअरी एंड डिस्टिलरी के लाइसेंस रद्द करने के आदेश को भी खारिज कर दिया है।

न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत ने राज्य सरकार और आबकारी विभाग को निर्देश दिए कि भविष्य में निरीक्षण के दौरान कानून और नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।

अदालत ने पाया कि निरीक्षण टीम नियमों के अनुरूप गठित नहीं थी, जिसमें आवश्यक अधिकारी शामिल नहीं थे। साथ ही, लाइसेंस रद्द करने का निर्णय बिना स्वतंत्र जांच के लिया गया, जो कानूनी रूप से गलत पाया गया।

हालांकि, कोर्ट ने विभाग को यह छूट दी है कि वह कंपनी को जारी कारण बताओ नोटिस पर दोबारा निष्पक्ष सुनवाई कर दो महीने के भीतर फैसला ले।

इन्फो बॉक्स:

  • फैसला: सीनियर को जूनियर से कम वेतन नहीं
  • आदेश: स्टेप-अप पे देने के निर्देश
  • एरियर: 3 साल पहले से लागू
  • ब्याज: देरी पर 6% वार्षिक
  • दूसरा मामला: ब्रूअरी लाइसेंस रद्द करने का आदेश खारिज
  • कारण: नियमों के खिलाफ जांच प्रक्रिया
  • निर्देश: दोबारा निष्पक्ष सुनवाई

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