

डंके की चोट पर: सुजानपुर होली मेले में अधिकारी-विधायक झूमे, लेकिन बड़ी घोषणाओं के बिना उत्सव रहा अधूरा
रजनीश शर्मा। हमीरपुर

आइए चलते हैं सुजानपुर के ऐतिहासिक चौगान में जहां जनता के बीच चल रही चर्चाओं को आप , प्रशासन और सरकार तक पहुंचाते हैं ……
सुजानपुर ने क्या पाया, क्या खोया – मेले के बाद शुरू हुई चर्चा
चार दिवसीय राष्ट्र स्तरीय सुजानपुर होली मेले के विधिवत समापन के बाद अब क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि इस बार के मेले में सुजानपुर को आखिर मिला क्या और छूटा क्या। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध इस मेले में प्रशासनिक और सांस्कृतिक रंग तो खूब दिखाई दिए, लेकिन बड़ी विकासात्मक घोषणाओं की कमी लोगों को खलती रही।
राजा संसार चंद की परंपरा से राष्ट्रीय पहचान तक
कटोच वंशज राजा संसार चंद द्वारा ब्रज शैली में शुरू किया गया सुजानपुर का होली उत्सव आज राष्ट्रीय स्तर का आयोजन बन चुका है। समय के साथ इस मेले को अंतरराष्ट्रीय स्तर का दर्जा देने की घोषणा भी की जा चुकी है, लेकिन अब तक औपचारिक अधिसूचना जारी न होने के कारण इसे मंडी शिवरात्रि, कुल्लू दशहरा, रामपुर लवी या चंबा मिंजर मेले जैसा सरकारी सम्मान और सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।
सीएम की गैरमौजूदगी से बड़ी घोषणाओं का अभाव
परंपरा के अनुसार मेले के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री का आना तय माना जाता है, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री अपनी व्यस्तता के चलते शामिल नहीं हो पाए। उनकी जगह उपमुख्यमंत्री ने शिरकत की, मगर सुजानपुर के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं हो सकी। हालांकि चंडीगढ़ के लिए दो अप-डाउन एचआरटीसी बसें चलाने की घोषणा जरूर हुई और चल रहे विकास कार्यों को गति देने का भरोसा दिया गया।
मंत्री और स्पीकर बने मुख्य अतिथि, पर सीमित दायरे में घोषणाएं
मेले के दौरान कैबिनेट मंत्री राजेश धर्मानी, विधायक सुरेश कुमार और अंतिम दिन विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मगर अपने-अपने संवैधानिक और प्रशासनिक दायरे के कारण बड़ी विकासात्मक घोषणाओं की उम्मीद पूरी नहीं हो पाई।
डीसी, एसपी और जनप्रतिनिधि पंजाबी धुनों पर थिरके
मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या में पुलिस प्रशासन की सख्ती को लेकर भले ही कुछ सवाल उठे, लेकिन बाद में माहौल पूरी तरह बदल गया। डीसी गंधर्वा राठौर और एसपी बलवीर सिंह ने विधायक कैप्टन रणजीत सिंह राणा और विधायक सुरेश कुमार की मौजूदगी में पंजाबी गीतों पर जमकर नृत्य किया। इससे मेले में मौजूद लोगों के लिए यादगार पल बन गए और शुरुआती नाराजगी पर भी मरहम लगा।
नाटी की धुनों पर झूमे विधानसभा अध्यक्ष
अंतिम सांस्कृतिक संध्या में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया भी नाटी किंग की सुरीली आवाज पर खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए। हिमाचली संस्कृति की झलक ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
मेला मैदान में स्वच्छता और व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
मेला मैदान के कई कोनों में शराब और कबाब के खाली लिफाफे बिखरे दिखाई दिए, जिससे स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल उठे। लोगों ने ऐसे मामलों पर सख्त अंकुश लगाने की जरूरत जताई।
इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान चलाई गई अतिरिक्त बसों की जानकारी आम जनता तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाई, जिससे कई लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा।

महिलाओं और आम जनता के लिए बेहतर सुविधाओं की मांग
मेले में आए लोगों ने सुझाव दिया कि मेला मैदान के चारों ओर दिन के समय धूप से बचाव के लिए छोटे-छोटे आकर्षक रेस्ट एरिया बनाए जाने चाहिए।
महिलाओं के लिए बच्चों को फीडिंग कराने के अलग केबिन, अस्थायी वाशरूम की संख्या बढ़ाने और अन्य सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता भी महसूस की गई।
अब 2027 के मेले से बड़ी उम्मीदें
कुल मिलाकर इस बार का मेला सांस्कृतिक रंगों से सराबोर जरूर रहा, लेकिन विकासात्मक घोषणाओं के मामले में उम्मीदें अधूरी रह गईं। अब सुजानपुर वासियों की निगाहें वर्ष 2027 के होली मेले पर टिक गई हैं। लोगों को उम्मीद है कि अगले वर्ष मुख्यमंत्री खुद मेले में शामिल होंगे और सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र के उहल तथा टौणी देवी कस्बों के लिए भी बड़ी घोषणाएं करेंगे।
इन्फो बॉक्स
सुजानपुर होली मेला – एक नजर
- अवधि: 4 दिन
- दर्जा: राष्ट्र स्तरीय (अंतरराष्ट्रीय दर्जे की घोषणा, अधिसूचना लंबित)
- शुरुआत: कटोच वंशज राजा संसार चंद द्वारा ब्रज शैली में
- मुख्य आकर्षण: सांस्कृतिक संध्याएं, हिमाचली नाटी, लोक संस्कृति
- इस बार की प्रमुख घोषणा: चंडीगढ़ के लिए दो एचआरटीसी बसों का संचालन
- प्रमुख मुद्दे: बड़ी घोषणाओं का अभाव, स्वच्छता और सुविधाओं में सुधार की जरूरत

Author: Polkhol News Himachal









