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बिना रेरा पंजीकरण प्लॉट और फ्लैट बेचना पड़ा महंगा, बिल्डर पर 51 लाख का जुर्माना

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बिना रेरा पंजीकरण प्लॉट और फ्लैट बेचना पड़ा महंगा, बिल्डर पर 51 लाख का जुर्माना

पोल खोल न्यूज़ | शिमला

हिमाचल प्रदेश रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में नियमों की अनदेखी पर कड़ा रुख अपनाते हुए मैसर्ज जी सिटी बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड बद्दी पर 51 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं, प्राधिकरण ने पाया कि संबंधित परियोजना का पंजीकरण कराए बिना 1 मई 2017 के बाद 51 आवंटन पत्र जारी किए गए, जो रेरा अधिनियम 2016 का उल्लंघन है। प्राधिकरण के आदेश के अनुसार, रियल इस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट 2016 की धारा 3(1) के तहत किसी अचल संपत्ति परियोजना का विज्ञापन, विक्रय या आवंटन बिना पंजीकरण नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद 1 मई 2017 से 30 मई 2017 के बीच 51 आवंटन पत्र जारी किए गए।

बताते चलें कि धारा 59(1) के अंतर्गत प्रति इकाई एक लाख रुपये की दर से कुल 51 लाख रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया। प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना को प्रगतिशील परियोजना की श्रेणी में माना जाएगा, क्योंकि अधिनियम लागू होने की तिथि तक संपूर्ण परियोजना का कंप्लीशन प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं हुआ था। ऐसे में कंपनी को तीन माह के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य था। हालांकि, पंजीकरण के लिए आवेदन 13 मई 2024 को किया गया, जो लगभग सात वर्ष की देरी को दर्शाता है और वर्तमान में भी परियोजना अपंजीकृत है। कंपनी की यह दलील भी खारिज कर दी गई, जिसमें कहा गया था कि आवंटन पूर्व बुकिंग की औपचारिकता मात्र थे। इनमें प्लाॅट, फ्लैट और दुकानें शामिल हैं।

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रेरा ने 15 दिनों के भीतर जुर्माना हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण निधि में जमा कराने के निर्देश दिए हैं, अन्यथा धारा 63 के तहत अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


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