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बार-बार आपराधिक मामले दर्ज करना मानसिक क्रूरता, फैमिली कोर्ट ने पति को दिया तलाक

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बार-बार आपराधिक मामले दर्ज करना मानसिक क्रूरता, फैमिली कोर्ट ने पति को दिया तलाक

पोल खोल न्यूज़ । शिमला

फैमिली कोर्ट शिमला (ठियोग कैंप) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि शादी के बाद पति या पत्नी के खिलाफ बार-बार आपराधिक मामले दर्ज करना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। अदालत ने इस आधार पर पति की ओर से दायर तलाक की याचिका को स्वीकार करते हुए विवाह समाप्त करने की अनुमति दे दी।

यह मामला कोटखाई उपमंडल के एक व्यक्ति से जुड़ा है, जिसने अदालत में तलाक की याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि शादी के बाद पति-पत्नी लगभग चार महीने तक गांव में साथ रहे, लेकिन इसके बाद पत्नी ससुराल छोड़कर चली गई। बाद में पत्नी इस शर्त पर वापस आई कि वह पति के साथ अलग घर में रहेगी। इसके बाद वह तीन महीने तक पति के साथ रही, लेकिन फिर दोबारा ससुराल छोड़कर चली गई।

परिवार के समझाने पर पत्नी लगभग एक महीने के लिए वापस आई, लेकिन इसके बाद हमेशा के लिए चली गई। इस दौरान पति को व्यापार में भारी नुकसान हुआ। साथ ही परिवार में दादी की मृत्यु और भाई की शादी जैसे कठिन समय में भी पत्नी ने सहयोग नहीं किया और ससुराल पक्ष के लिए समस्याएं खड़ी कीं।

पति पक्ष की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद पत्नी ने दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा सहित कई आपराधिक मामले दर्ज कराए। अदालत ने पाया कि पत्नी ने पति और उसके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए, जबकि दूसरी ओर उसने अदालत में यह भी कहा कि वह पति के साथ रहना चाहती है। अदालत ने इसे विरोधाभासी और अविश्वसनीय माना।

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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पति ने ठोस साक्ष्यों के आधार पर पत्नी द्वारा मानसिक क्रूरता किए जाने को साबित किया है। पति ने अलग रहने के लिए आवास की व्यवस्था भी की थी, जिससे स्पष्ट होता है कि उसने वैवाहिक संबंध बनाए रखने का प्रयास किया। अदालत ने माना कि पत्नी का व्यवहार वैवाहिक संबंध निभाने की मंशा के अनुरूप नहीं था और इसी आधार पर पति को तलाक की मंजूरी दी गई।


पदोन्नति वेतन वृद्धि मामले में सरकार की अपील पर सुनवाई

में राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को पदोन्नति इंक्रीमेंट देने संबंधी एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ अपील दायर की है। मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीश की खंडपीठ ने इस मामले में सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं।

खंडपीठ ने सरकार द्वारा अपील दाखिल करने में हुई 176 दिनों की देरी को माफ कर दिया है, लेकिन एकल न्यायाधीश के फैसले पर फिलहाल कोई रोक नहीं लगाई है। मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी।


इन्फो बॉक्स:

क्या है अदालत की मुख्य टिप्पणी:

  • बार-बार आपराधिक केस दर्ज करना मानसिक क्रूरता माना जाएगा।
  • विरोधाभासी बयान अदालत में विश्वसनीय नहीं माने जाते।
  • मानसिक क्रूरता तलाक का वैध आधार हो सकती है।

पति के पक्ष में प्रमुख तथ्य:

  • पत्नी कई बार ससुराल छोड़कर गई।
  • पति ने अलग रहने की व्यवस्था भी की थी।
  • पत्नी ने दहेज और घरेलू हिंसा के कई मामले दर्ज किए।

इंक्रीमेंट मामले में स्थिति:

  • सरकार ने एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ अपील की।
  • खंडपीठ ने नोटिस जारी किए, लेकिन फैसले पर रोक नहीं।
  • अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी।

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