

हिमाचल प्रदेश सरकार ने सी-फार्म नियम बदले, देरी पर लगेगा जुर्माना
पोल खोल न्यूज़ डेस्क । शिमला

हिमाचल प्रदेश में केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) से जुड़े घोषणापत्र और प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब सी-फार्म जमा करने में देरी करने वाले कारोबारियों को जुर्माना देना होगा। पहले तकनीकी कारणों से सी-फार्म समय पर जमा न होने पर अन्य राज्यों के साथ व्यापार प्रभावित होता था, जिससे व्यापारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने केंद्रीय बिक्री कर (हिमाचल प्रदेश) नियम, 1970 में संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत नियम 6-बी में नया प्रावधान जोड़ा गया है, जिससे घोषणा पत्र और प्रमाणपत्र दोबारा जारी करने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाया गया है।
नए नियमों के अनुसार अब प्रमाणपत्र जारी होने की तिथि से छह महीने बाद तक भी कारोबारी आवेदन कर सकेंगे और बिना तत्काल बाधा के कारोबार जारी रख पाएंगे। हालांकि, इसके लिए उन्हें जुर्माना देना अनिवार्य होगा। देरी से आवेदन करने की स्थिति में संबंधित प्राधिकरण कारोबारी को सुनवाई का अवसर देगा और देरी को कंपाउंड करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इस प्रक्रिया के तहत कारोबारी को नए फॉर्म के मूल्य का 0.1 प्रतिशत या न्यूनतम 50,000 रुपये (जो भी अधिक हो) जुर्माने के रूप में जमा कराने होंगे। जुर्माना जमा होने के बाद संबंधित प्राधिकरण पुराने फॉर्म को रद्द करने और नया फॉर्म जारी करने की सिफारिश संबंधित जोन के ज्वाइंट कमिश्नर को करेगा। अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही नया फॉर्म जारी किया जाएगा।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पहले तकनीकी कारणों से कई बार सी-फार्म समय पर जमा नहीं हो पाते थे, जिससे व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। नए संशोधन से ऑनलाइन प्रणाली अधिक मजबूत होगी और समय पर आवेदन करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही लंबे समय बाद फॉर्म जारी कराने से जुड़े मामलों में होने वाली अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी और कर निर्धारण एवं रिकॉर्ड सत्यापन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
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📦 इन्फो बॉक्स
क्या बदला है
- सी-फार्म जमा करने में देरी पर अब जुर्माना लगेगा
- केंद्रीय बिक्री कर (हिमाचल प्रदेश) नियम, 1970 के नियम 6-बी में संशोधन
कितना लगेगा जुर्माना
- नए फॉर्म के मूल्य का 0.1 प्रतिशत
- या न्यूनतम 50,000 रुपये (जो भी अधिक हो)
कितने समय बाद तक आवेदन संभव
- प्रमाणपत्र जारी होने की तिथि से 6 महीने बाद तक आवेदन किया जा सकता है
क्यों किया गया बदलाव
- ऑनलाइन प्रणाली को मजबूत करने के लिए
- देरी और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए
- व्यापारियों को समय पर आवेदन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए
क्या होगा फायदा
- तकनीकी कारणों से देरी होने पर राहत
- व्यापार प्रभावित हुए बिना प्रक्रिया पूरी करने की सुविधा
- कर रिकॉर्ड और सत्यापन प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी

Author: Polkhol News Himachal










