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हाईकोर्ट ने कहा- मामले के लंबित रहते पानी का कनेक्शन काटना प्राकृतिक सिद्धांत का उल्लंघन

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हाईकोर्ट ने कहा- मामले के लंबित रहते पानी का कनेक्शन काटना प्राकृतिक सिद्धांत का उल्लंघन

पोल खोल न्यूज़ शिमला।

हाईकोर्ट ने नागरिक अधिकारों को लेकर दायर एक मामले में स्पष्ट किया है कि जब तक किसी कथित अवैध निर्माण का मामला संबंधित विभाग के समक्ष विचाराधीन है, तब तक बिना किसी अंतिम आदेश के पानी जैसी मूलभूत सुविधा को काटना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नागरिक अधिकारों को लेकर दायर एक मामले में स्पष्ट किया है कि जब तक किसी कथित अवैध निर्माण का मामला संबंधित विभाग के समक्ष विचाराधीन है, तब तक बिना किसी अंतिम आदेश के पानी जैसी मूलभूत सुविधा को काटना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने जल शक्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ा एतराज जताया। जब नगर परिषद का मुख्य नोटिस अभी विचाराधीन है और उस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, तो जल शक्ति विभाग के पास पानी काटने का कोई कानूनी आधार नहीं था।
कानून के दायरे में रहकर ही आगे की कार्रवाई करें: अदालत
जबकि नगर परिषद ने विभाग को पानी काटने का कोई निर्देश नहीं दिया था, फिर भी विभाग ने स्वतः ही यह कदम उठा लिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए जल शक्ति विभाग की ओर जारी 4 मई 2026 के नोटिस को रद्द कर दिया है। अदालत ने प्रतिवादियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे कानून के दायरे में रहकर ही आगे की कार्रवाई करें। यह मामला कांगड़ा जिले के देहरा तहसील का है। याचिकाकर्ता रीमा देवी को नगर परिषद देहरा ने 21 अप्रैल 2026 को हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम, 1977 की धारा 39 (1) के तहत एक नोटिस जारी किया था।
नगर परिषद ने लगाया था ये आरोप
नगर परिषद का आरोप था कि याचिकाकर्ता ने वार्ड नंबर 6 में बिना अनुमति के भवन निर्माण किया है। नगर परिषद ने याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया था। इसके अनुपालन में याचिकाकर्ता ने 27 अप्रैल 2026 को अपना जवाब दाखिल कर दिया। मामले में नया मोड़ तब आया, जब 4 मई 2026 को जल शक्ति उपमंडल देहरा के सहायक अभियंता ने याचिकाकर्ता को एक नोटिस थमा दिया। इस नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि यदि वैध अनुमति या सक्षम प्राधिकारी का अनुमोदन प्रस्तुत नहीं किया गया, तो उनके परिसर की जलापूर्ति काट दी जाएगी। जल शक्ति विभाग ने यह कार्रवाई नगर परिषद की ओर से जारी उसी शुरुआती नोटिस के आधार पर की थी, जिस पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी था।

फार्मा कंपनी के हिस्सेदारों के खिलाफ दर्ज आपराधिक शिकायत रद्द
प्रदेश हाईकोर्ट ने दवाओं की गुणवत्ता और मानकों से जुड़े एक मामले में नालागढ़ की मैसर्स सालूस फार्मास्युटिकल्स और उसके भागीदारों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत दर्ज आपराधिक शिकायत और निचली अदालत की कार्यवाही को पूरी तरह रद्द कर दिया है। न्यायालय ने माना कि केवल पार्टनर होने के नाते किसी व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि उसकी प्रत्यक्ष संलिप्तता साबित न हो। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा कि बिना स्पष्ट भूमिका तय किए कंपनी के हर पार्टनर को आपराधिक मामले में घसीटना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। उल्लेखनीय है कि अगस्त 2019 में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने जालंधर कैंट स्थित मिलिट्री अस्पताल से मेड्रोफेक्स-180 टैबलेट और अन्य दवाओं के नमूने लिए थे। परीक्षण प्रयोगशाला की जांच में ये नमूने मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाए गए। जांच में मामला सोलन जिले के बद्दी स्थित फार्मास्युटिकल्स कंपनी तक पहुंचा।

इसके बाद केंद्रीय ड्रग्स इंस्पेक्टर ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई और एडिशनल सेशन जज नालागढ़ ने मार्च 2022 में कंपनी के पार्टनर्स के खिलाफ समन जारी किए थे। याचिकाकर्ता कंपनी ने इसी आदेश को रद्द करने को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत ने फैसले में कहा कि ड्रग्स एक्ट की धारा 34 के तहत केवल उन्हीं व्यक्तियों को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है, जो अपराध के समय व्यवसाय के संचालन के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार थे। शिकायत में इस बात का कोई ठोस जिक्र नहीं था कि पार्टनर्स निर्माण प्रक्रिया में शामिल थे। चूंकि फर्म ने पहले ही तकनीकी विशेषज्ञों के नाम लाइसेंसिंग अथॉरिटी को दे रखे थे, इसलिए केवल पार्टनर होने के नाते उन पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के चैप्टर-IV (विनिर्माण और बिक्री) के तहत कार्रवाई करने का अधिकार केवल राज्य सरकार द्वारा नियुक्त ड्रग्स इंस्पेक्टर को है, न कि केंद्र सरकार के इंस्पेक्टर को। कंपनी के पार्टनर्स फर्म के दैनिक कामकाज या दवाओं के निर्माण में सीधे शामिल नहीं थे। फर्म ने इस कार्य के लिए बाकायदा तकनीकी स्टाफ और प्लांट मैनेजर नियुक्त किए थे

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