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सरस्वती संस्कृत कॉलेज डंगार मामले में हाईकोर्ट सख्त, सरकार पर 50 हजार जुर्माना

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सरस्वती संस्कृत कॉलेज डंगार मामले में हाईकोर्ट सख्त, सरकार पर 50 हजार जुर्माना

पोल खोल न्यूज़ । शिमला/ बिलासपुर 

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जिला बिलासपुर के सरस्वती संस्कृत कॉलेज डंगार के कर्मचारी अधिग्रहण मामले में कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने कहा कि यह मुकदमेबाजी का तीसरा दौर पूरी तरह अनावश्यक था।

अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार का कर्तव्य है कि वह अपने ही नियमों और अधिसूचनाओं का पालन करे, न कि कर्मचारियों को बार-बार अदालतों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर करे। फैसले में कहा गया है कि अधिग्रहण की तारीख ही पात्रता तय करने का आधार होगी।

कोर्ट ने 25 अगस्त 1994 की अधिसूचना के क्लॉज-7 का हवाला देते हुए कहा कि 17 जून 2021 (टेकओवर की तारीख) ही प्रासंगिक है। इससे पहले एकल पीठ सरकार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगा चुकी थी। खंडपीठ ने इस अपील को पूरी तरह गलत मानते हुए 25 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगा दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार अपनी ही नीतियों और अदालती फैसलों से बंधी हुई है। बार-बार अपील करना और कानूनी आदेशों की गलत व्याख्या करना न्यायिक समय की बर्बादी है।

अदालत ने पाया कि इसी विषय पर खंडपीठ पहले ही 31 मई 2024 को फैसला सुना चुकी थी। इसके बावजूद सरकार ने आदेशों की अवहेलना की और कर्मचारियों की पात्रता को गलत तरीके से निरीक्षण की तारीख से जोड़ दिया, जबकि नियम अधिग्रहण की तारीख को ही आधार मानते हैं।


 

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