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हिमाचल में मत्स्य क्षेत्र को बड़ा सहारा: मछलियों पर पहली बार MSP, मछुआरों को सीधी राहत

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🟥 हिमाचल में मत्स्य क्षेत्र को बड़ा सहारा: मछलियों पर पहली बार MSP, मछुआरों को सीधी राहत

शिमला | पोल खोल न्यूज़ डेस्क

हिमाचल प्रदेश सरकार ने मत्स्य क्षेत्र को सशक्त बनाने और मछुआरों की आजीविका सुरक्षित करने के लिए कई दूरदर्शी कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के बजट 2026-27 की घोषणाओं के अनुरूप मत्स्य विभाग इन योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी में जुट गया है। इन पहलों का उद्देश्य मछुआरों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाना, उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना और आय में वृद्धि करना है।


🔴 मछलियों पर पहली बार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)

प्रदेश के इतिहास में पहली बार जलाशयों से प्राप्त मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया गया है। सरकार ने MSP 100 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया है, जिससे मछुआरों को मूल्य में गिरावट से सुरक्षा मिलेगी और उनकी आय सुनिश्चित होगी।


🔴 DBT के जरिए मिलेगी अतिरिक्त सब्सिडी

यदि नीलामी में मछलियों का दाम 100 रुपये प्रति किलो से कम रहता है, तो राज्य सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से प्रति किलोग्राम अधिकतम 20 रुपये तक की सब्सिडी देगी। यह राशि सीधे मछुआरों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी, जिससे पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।


🔴 रॉयल्टी दर में भारी कटौती, मछुआरों को राहत

सरकार ने मछुआरों को बड़ी राहत देते हुए जलाशयों से मिलने वाली मछलियों पर रॉयल्टी दर को 15% से घटाकर पहले 7.5% किया था, जिसे अब और कम कर मात्र 1% कर दिया गया है। इस फैसले से प्रदेश के 6,000 से अधिक मछुआरों को सीधा लाभ मिलेगा।


🔴 जलाशयों में बढ़ा उत्पादन, उन्नत तकनीकों का असर

प्रदेश के प्रमुख जलाशयों—गोबिंद सागर, पोंग डैम, रंजीत सागर, चमेरा और कोल डैम—में मछली उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। उन्नत फिंगरलिंग्स (70-100 मिमी) के नियमित स्टॉकिंग से उत्पादन वर्ष 2022-23 के 549.35 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 818.02 मीट्रिक टन हो गया है।


🔴 प्रमुख प्रजातियों का बढ़ रहा दायरा

इन जलाशयों में सिल्वर कार्प, सिंधारा, रोहू, कतला, मृगल, कॉमन कार्प और ग्रास कार्प जैसी प्रजातियां प्रमुख रूप से पाई जाती हैं, जो मत्स्य अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रही हैं।


🔴 कुल मछली उत्पादन में भी बढ़ोतरी

प्रदेश में कुल मछली उत्पादन भी लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2024-25 में 19,019 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 20,005 मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया है, जो इस क्षेत्र में हो रहे विकास को दर्शाता है।


🔴 सतत विकास और रोजगार पर जोर

सरकार के इन प्रगतिशील कदमों से मत्स्य अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, सतत मछली पकड़ने की पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा और मछुआरा समुदाय की भागीदारी बढ़ेगी। साथ ही ग्रामीण रोजगार और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नया बल मिलेगा।


📊 इन्फो बॉक्स

  • 🐟 मछलियों पर पहली बार MSP लागू – ₹100 प्रति किलो
  • 💸 ₹20 प्रति किलो तक DBT सब्सिडी का प्रावधान
  • 📉 रॉयल्टी दर घटाकर 1% की गई
  • 👥 6,000+ मछुआरों को सीधा लाभ
  • 📈 उत्पादन 549 MT से बढ़कर 818 MT (जलाशयों में)
  • 🌊 कुल उत्पादन 20,005 मीट्रिक टन पहुंचा
  • ⚙️ उन्नत तकनीकों से उत्पादन में वृद्धि
  • 💼 रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती

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