

चहेते अधिकारियों को एडजस्ट करने के लिए स्थानांतरण सांविधानिक अधिकारों का उल्लंघन : हाईकोर्ट
पोल खोल न्यूज़ | शिमला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी विशेष व्यक्ति को एडजस्ट करने के लिए प्रशासनिक शक्तियों का मनमाना उपयोग सांविधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। वहीं, अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता का तबादला किसी प्रशासनिक जरूरत के कारण नहीं, बल्कि अन्य पसंदीदा अधिकारियों को उनकी जगह तैनात करने के लिए किया गया था। याचिकाकर्ता रामपुर उपमंडल के ननखड़ी में विषय विशेषज्ञ (एसएमएस हॉर्टिकल्चर) पद पर तैनात थे। उन्होंने अपना तबादला डोडरा क्वार किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।
ये भी पढ़ें :यूजीसी की गाइडलाइंस नहीं मानी जाएंगी: 7 मार्च को गांधी चौक पर सामान्य वर्ग का शक्ति प्रदर्शन
उन्हें यहां पर आए अभी मात्र सात महीने ही हुए थे। इससे पहले वह रोहड़ू में अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा कर चुके थे। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से 9 दिसंबर को जारी उनके तबादला आदेश को भी रद्द कर दिया है। वहीं, न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के तर्क को खारिज कर दिया। सरकार ने दावा किया कि तबादला जनहित में है, लेकिन कोर्ट ने पाया कि फाइल में ऐसे किसी ठोस कारण का जिक्र नहीं था। कोर्ट ने नोट किया कि जिन निजी प्रतिवादियों (अधिकारियों) को ननखड़ी भेजा जा रहा था, उन्हें बिना टीटीए (यात्रा भत्ता) के ट्रांसफर किया गया। यह स्पष्ट करता है कि उनकी ट्रांसफर उनके स्वयं के अनुरोध पर हुई थी न कि विभाग की जरूरत पर।
अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का हवाला देते हुए कहा कि समानता और मनमानापन एक-दूसरे के दुश्मन हैं। राज्य की कार्रवाई निष्पक्ष और वैध सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। वहीं, अदालत ने कहा-हालांकि क्लास वन अधिकारियों का कोई निश्चित कार्यकाल नहीं होता, लेकिन सात महीने का समय किसी भी नजरिये से उचित नहीं है। अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता को ननखड़ी में ही उचित समय तक अपनी सेवाएं जारी रखने की अनुमति दी जाए।

Author: Polkhol News Himachal










