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डंके की चोट पर : सिस्टम का मज़ाक बना रहे शिक्षा अधिकारी, ‘मर्ज’ स्कूलों के प्रिंसिपल डिप्टी डायरेक्टर दफ्तरों में  शोभायमान हुए

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डंके की चोट पर: सिस्टम का मज़ाक बना रहे शिक्षा अधिकारी, ‘मर्ज’ स्कूलों के प्रिंसिपल डिप्टी डायरेक्टर दफ्तरों में शोभायमान हुए

कैम्पस दो, लेकिन प्रिंसिपल एक! 70 से ज्यादा स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था की यही दशी, बिना काम के 100+ प्रिंसिपल ले रहे वेतन

रजनीश शर्मा। हमीरपुर

हिमाचल प्रदेश में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ‘मर्ज’ किए गए स्कूलों में छात्रों और शिक्षकों की जिम्मेदारी तो बढ़ा दी गई, लेकिन प्रिंसिपल साहबों की कुर्सियां दफ्तरों में सजा दी गईं। नतीजा—दफ्तरों में भीड़ का जमाव!

जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब 70 से अधिक स्कूलों में यही स्थिति बनी हुई है। स्कूलों में प्रिंसिपल का पद तो है, लेकिन वे विद्यालयों की बजाय डिप्टी डायरेक्टर कार्यालयों में अटैच होकर बैठाए गए हैं। सवाल उठता है—जब स्कूलों को सबसे अधिक जरूरत शैक्षणिक नेतृत्व की है, तो प्रिंसिपल दफ्तरों में क्यों?


📌 कैम्पस बढ़े, जिम्मेदारी बढ़ी… लेकिन नेतृत्व गायब

‘मर्ज’ नीति के तहत दो या अधिक स्कूलों को जोड़कर एक इकाई बना दिया गया। छात्र संख्या बढ़ी, शिक्षकों का दबाव बढ़ा, लेकिन मर्ज स्कूलों के प्रिंसिपल  डिप्टी डायरेक्टर दफ्तरों में मुफ्त की सैलरी लेने के लिए बैठा दिए गए।


💰 बिना जिम्मेदारी के वेतन?

सूत्रों की मानें तो 100 से ज्यादा प्रिंसिपल नियमित वेतन ले रहे हैं, लेकिन उनके पास न तो स्वतंत्र स्कूल की जिम्मेदारी है और न ही स्पष्ट प्रशासनिक भूमिका। यह स्थिति न केवल सरकारी खजाने पर बोझ है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के साथ भी मजाक है।


❓ उठते सवाल

  • क्या ‘मर्ज’ नीति लागू करने से पहले जमीनी हालात का आकलन किया गया था?
  • जब स्कूलों में प्रिंसिपल की जरूरत है, तो उन्हें कार्यालयों में क्यों बैठाया गया?
  • क्या शिक्षा विभाग इस व्यवस्था की समीक्षा करेगा?


🗣️ अभिभावकों और शिक्षकों में रोष

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिक्षकों का भी मानना है कि बिना स्थायी नेतृत्व के स्कूलों का संचालन प्रभावित हो रहा है।


⚠️ अब देखना यह है…

क्या सरकार और शिक्षा विभाग इस “सिस्टम के मज़ाक” को गंभीरता से लेते हैं या फिर फाइलों में ही सुधार की बातें दबी रह जाएंगी?


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