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निर्जला एकादशी पर शारदा माँ भटेड़ मंदिर में सेवा का संगम, युवाओं ने लगाई छबील

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निर्जला एकादशी पर शारदा माँ भटेड़ मंदिर में सेवा का संगम, युवाओं ने लगाई छबील

श्रद्धालुओं को पिलाया शीतल जल व वितरित किया प्रसाद, सेवा भाव से जीता सभी का दिल

संजय लगवाल। ऊहल

निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर शारदा माँ भटेड़ मंदिर में स्थानीय युवाओं द्वारा श्रद्धालुओं की सेवा के लिए छबील का आयोजन किया गया। भीषण गर्मी के बीच मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को ठंडा मीठा जल एवं प्रसाद वितरित किया गया। इस सेवा कार्य में युवाओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लेते हुए धर्म और मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने छबील का प्रसाद ग्रहण किया और युवाओं के इस सेवा कार्य की सराहना की। ग्रामीणों, महिलाओं एवं बुजुर्गों ने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन समाज में भाईचारा, सहयोग और सेवा की भावना को मजबूत करते हैं तथा नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।

युवाओं ने कहा कि भविष्य में भी इसी प्रकार धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के माध्यम से जनसेवा का कार्य निरंतर जारी रखा जाएगा।

📦 जनसेवा में सहयोग देने वाले युवा

अनूप

रजनीश

सनी (Sunny)

लकी ठाकुर (BDC)

सुनील कुमार

अभिमन्यु

रितिक ठाकुर

आदित्य ठाकुर

संजय ठाकुर

सुरेश हरि ठाकुर

राकेश लगवाल (Rakesh Lagwal)

एवं अन्य युवा साथी

 

📦 जानिए: निर्जला एकादशी का महत्व

निर्जला एकादशी को वर्ष की सभी 24 एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना तथा व्रत करने से सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन जलदान, छबील, अन्नदान और जरूरतमंदों की सेवा का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि निर्जला एकादशी का व्रत और सेवा कार्य करने से सुख, समृद्धि, आरोग्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि महाभारत काल में भीमसेन ने वेदव्यास के निर्देश पर इसी एकादशी का व्रत रखा था, इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।

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