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राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस पर जागरूकता: “सुरक्षित मां, स्वस्थ भविष्य” पर जोर

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राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस पर जागरूकता: “सुरक्षित मां, स्वस्थ भविष्य” पर जोर

संजय ठाकुर। ऊहल

मॉडल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जंगलबेरी में राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान डॉ. सुरेंद्र सिंह डोगरा ने सुरक्षित मातृत्व के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसके छह प्रमुख स्तंभों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सुरक्षित मातृत्व के छह स्तंभ हैं—परिवार नियोजन, प्रसवपूर्व देखभाल, प्रसूति देखभाल, प्रसवोत्तर देखभाल, गर्भपात के बाद की देखभाल और यौन संचारित रोग/एचआईवी नियंत्रण। इन सभी पहलुओं पर ध्यान देकर मातृ और शिशु मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

डॉ. डोगरा ने बताया कि भारत में हर वर्ष 11 अप्रैल को राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है, जो कस्तूरबा गांधी की जयंती के साथ जुड़ा हुआ है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, उचित पोषण और देखभाल के प्रति जागरूक करना है।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का पहला देश है जिसने आधिकारिक तौर पर इस दिवस को मनाने की शुरुआत की। इसका लक्ष्य संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना है, ताकि असुरक्षित परिस्थितियों में होने वाले प्रसव से माताओं की जान को खतरा न हो।

सरकारी प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जननी सुरक्षा योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता और मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इस प्रकार के कार्यक्रम मातृ स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सुरक्षित मातृत्व केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास का आधार है।

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