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हजारों अनुबंध कर्मियों और दैनिक-आकस्मिक वेतनभोगियों को नियमितीकरण का तोहफा

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हजारों अनुबंध कर्मियों और दैनिक-आकस्मिक वेतनभोगियों को नियमितीकरण का तोहफा

पोल खोल न्यूज़ । शिमला 

हिमाचल प्रदेश सरकार ने अनुबंध कर्मचारियों और दैनिक व आकस्मिक वेतनभोगियों को नियमितीकरण का तोहफा दिया है। इस संबंध में बुधवार को कार्मिक विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की गई है। विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों, सभी मंडलीय आयुक्त, सभी विभागाध्यक्ष व डीसी को इन निर्देशों को सभी संबंधित व्यक्तियों के संज्ञान में लाने और इनका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।

वहीं, अधिसूचना के अनुसार उन अनुबंध नियुक्त कर्मचारियों की सेवाएं नियमित की जा सकती हैं, जिन्होंने 31 मार्च 2026 तक दो वर्ष की निरंतर सेवा पूरी कर ली है। इसके अतिरिक्त, यह भी निर्णय लिया गया है कि जिन अनुबंध नियुक्त कर्मचारियों की दो वर्ष की निरंतर सेवा 30 सितंबर 2026 तक पूरी होने वाली है, उन्हें भी 30 सितंबर के बाद नियमित कर दिया जाएगा। यह नियमितीकरण निर्धारित औपचारिकताओं को पूर्ण करने के बाद शर्तों के अधीन किया जाएगा।

बताते चलें कि अनुबंध पर नियुक्त कर्मचारी, उपलब्ध रिक्तियों के विरुद्ध नियमितीकरण के पात्र होंगे। नियमितीकरण पूरी तरह से वरिष्ठता के आधार पर होगा, बशर्ते कि पद के लिए भर्ती और पदोन्नति नियमों में निर्धारित पात्रता मानदंड आदि का पालन, अनुबंध पर उनकी प्रारंभिक भर्ती के समय किया गया हो। कर्मचारी उस पद के लिए चिकित्सकीय रूप से फिट होना चाहिए। कर्मचारी का चिकित्सा फिटनेस प्रमाण पत्र प्राप्त करना निहित प्रावधानों के अनुसार सुनिश्चित किया जाएगा।

नियमितीकरण के लिए विचाराधीन उम्मीदवार के चरित्र और पूर्ववृत्त के सत्यापन के अधीन होगा। संबंधित उम्मीदवार की जन्म तिथि निर्धारित करने के लिए वित्तीय नियम, 2009 के नियम 172 में निर्धारित मानदंडों का पालन किया जाएगा। नियमितीकरण के लिए संबंधित विभाग में एक स्क्रीनिंग समिति का गठन किया जाएगा। जिन अनुबंध पर नियुक्त कर्मचारियों को नियमित किया जाना है, उन्हें पद के ‘टाइम स्केल’ (वेतनमान) के न्यूनतम स्तर पर नियुक्त किया जाएगा। जिन अनुबंध पर नियुक्त कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा, वे राज्य में कहीं भी तैनात किए जाने के लिए उत्तरदायी होंगे। नियमितीकरण इसके आदेश जारी होने की तिथि से प्रभावी होगा।

इसी तरह 31 मार्च 2026 तक चार वर्ष की निरंतर सेवाएं पूरी करने वाले सभी विभागों में दैनिक वेतनभोगी/आकस्मिक वेतनभोगी कर्मचारियों को संबंधित विभागों में केवल रिक्त पदों के विरुद्ध ही नियमित की जा सकती हैं। चार वर्ष निरंतर सेवा (एक कैलेंडर वर्ष में न्यूनतम 240 दिनों के साथ, सिवाय उन मामलों के जहां जनजातीय क्षेत्रों के लिए अन्यथा निर्दिष्ट किया गया हो) मानी जाएगी। इसके अतिरिक्त यह भी निर्णय लिया गया है कि दैनिक वेतनभोगी/आकस्मिक वेतनभोगी कर्मचारी, जिनकी 30 सितंबर तक चार वर्ष की सेवा पूरी होने वाली है, उन्हें भी 30 सितंबर के बाद नियमित किया जाएगा। मानदंडों/सिद्धांतों का पालन करते हुए सभी सांविधिक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद नियमितीकरण का आदेश जारी होने की तिथि से प्रभावी होगा।

बताते चलें कि किसी भी श्रेणी का कोई नया पद सृजित नहीं किया जाएगा। नियमितीकरण के बाद संबंधित दैनिक वेतनभोगी/आकस्मिक वेतनभोगी कर्मचारी का मूल पद समाप्त कर दिया जाएगा। नियमितीकरण उस वर्ष के लिए संबंधित विभाग को आवंटित बजट की उपलब्धता के अधीन होगा। चूंकि कोई नया पद सृजित नहीं किया जाना है, इसलिए किसी अतिरिक्त निधि/बजट की मांग नहीं की जाएगी। चार वर्ष की निरंतर सेवा केवल एक पात्रता मानदंड है और नियमितीकरण केवल भावी प्रभाव से होगा। यानि उस तिथि के बाद, जब आवश्यक वैधानिक औपचारिकताएं पूरी होने के उपरांत नियमितीकरण के आदेश जारी किए जाएंगे। नियमितीकरण के लिए विचाराधीन दैनिक वेतनभोगी/आकस्मिक वेतनभोगी कर्मचारियों के पास प्रारंभिक नियुक्ति के समय उस पद के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए। यदि आवश्यक हो तो सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से शैक्षणिक योग्यता में छूट दी जा सकती है। ऐसे दैनिक वेतनभोगी/आकस्मिक वेतनभोगी कर्मचारी के मामले में, जिसने उच्च वेतनमान वाले पद पर चार वर्ष से कम अवधि तक उच्च वेतन पर कार्य किया है, उसके नियमितीकरण पर विचार करते समय निम्न वेतनमान वाले पद और उच्च वेतनमान वाले पद, दोनों की सेवाओं को संयुक्त किया जाएगा। लेकिन उसका नियमितीकरण निम्न पद पर ही किया जाएगा, क्योंकि उच्च पद पर नियमितीकरण के लिए, उच्च वेतनमान वाले पद पर 4 वर्ष की पूर्ण दैनिक वेतनभोगी/आकस्मिक वेतनभोगी सेवा अनिवार्य होगी।

इन कर्मचारियों को संबंधित श्रेणियों के पदों पर पूरी तरह से वरिष्ठता के आधार पर नियमित किया जा सकता है, बशर्ते कि अयोग्य कर्मचारियों को अस्वीकृत कर दिया जाए। ऐसा करने पर, यदि आरक्षित/फीडर श्रेणी के लिए कोई रोस्टर बिंदु कम उपयोग में रहता है, तो भविष्य की भर्तियों में बैकलॉग को पहले भरकर इसकी भरपाई की जाएगी। ऐसे दैनिक वेतनभोगी/आकस्मिक वेतनभोगी कर्मचारी, जो दैनिक वेतन/आकस्मिक वेतन के आधार पर नियुक्त किए जाने के समय, संबंधित भर्ती और पदोन्नति नियमों में निर्धारित आयु सीमा के भीतर थे, उन्हें नियमितीकरण के लिए विचार किया जा सकता है; भले ही अब वे अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके हों। ऐसे दैनिक वेतनभोगी/आकस्मिक वेतनभोगी कर्मचारी, जिन्हें रोजगार कार्यालय की ओर से प्रायोजित किए बिना नियुक्त किया गया है, उन्हें उनकी सेवाओं को नियमित करते समय छूट दी जा सकती है। उन पदों के मामले में जो लोक सेवा आयोग के दायरे में आते हैं, सेवाओं के नियमितीकरण के लिए विभाग(विभागों) को लोक सेवा आयोग से पूर्व परामर्श करने की आवश्यकता नहीं है। इस नीति के तहत नियमित किए गए दैनिक वेतनभोगी/आकस्मिक वेतनभोगी कर्मचारियों की वरिष्ठता, नियमित आधार पर नियुक्त कर्मचारियों के मुकाबले, उनके नियमितीकरण के परिणामस्वरूप निर्धारित की जाएगी। ऐसे दैनिक वेतनभोगी/आकस्मिक वेतनभोगी कर्मचारियों की आपसी वरिष्ठता दैनिक वेतनभोगी/आकस्मिक वेतनभोगी के रूप में उनकी वरिष्ठता पर आधारित नियमितीकरण के क्रम के अनुसार निर्धारित की जाएगी। नियमितीकरण के परिणामस्वरूप कोई रिक्तियां उत्पन्न नहीं होंगी, क्योंकि ऐसी रिक्तियों को समाप्त कर दिया जाएगा। यदि कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं है, तो नियमितीकरण उपलब्ध समान वेतन बैंड वाले समतुल्य श्रेणी-चतुर्थ पदों के विरुद्ध किया जा सकता है।

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