
सुजानपुर के चौक से सरकारी परी गायब ,, अब कमरे में ‘VIP’ बनी बैठी है परी
पोल खोल न्यूज सुजानपुर/हमीरपुर
सुजानपुर के एक चौक पर लाखों रुपये खर्च कर स्थापित की गई “सरकारी परी” आखिरकार अपनी ही किस्मत पर उड़ान भरते-भरते गायब हो गई। फर्क बस इतना है कि इस बार परी आसमान में नहीं, बल्कि नगर परिषद के एक सुरक्षित कमरे में “आराम फरमा” रही है।
कहते हैं कि परियों को खुले आसमान में रहना पसंद होता है, लेकिन यहां तो नगर परिषद ने उसे चार दीवारों के बीच “VIP ट्रीटमेंट” दे दिया है। वजह? चौक पर उसे रखने के लिए “उचित स्थान” नहीं मिल पाया। अब यह बात अलग है कि करोड़ों की योजनाओं में जगह मिल जाती है, लेकिन एक बेचारी परी के लिए एक कोना भी नहीं!
“उड़नछू” होने की सरकारी कहानी
सूत्र बताते हैं कि बीते साल राष्ट्रीय होली उत्सव के दौरान शहर को सुंदर बनाने के लिए परी की मूर्ति लगाई गई थी। मकसद था कि बाहर से आने वाले लोग आकर्षित हों।
लेकिन आकर्षण ऐसा हुआ कि अब खुद मूर्ति ही लोगों से “आकर्षित होकर” गायब हो गई।
नगर परिषद का कहना है कि मूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए हटा दिया गया है, ताकि भविष्य में उसे किसी “बेहतर जगह” पर स्थापित किया जा सके।
मतलब साफ है — अभी तो परी “ट्रायल रूम” में है, असली रैंप वॉक बाकी है!
जनता के सवाल, जवाब हवा में
चौक पर अब खाली जगह देखकर लोग सोच में पड़ गए हैं —
“यहां कभी परी थी, या यह भी कोई सरकारी सपना था?”
स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों खर्च करने के बाद अगर मूर्ति को कमरे में ही रखना था, तो क्यों न सीधे अलमारी में ही उद्घाटन कर देते! कम से कम धूल और धूप से तो बची रहती।
व्यंग्य की चाशनी में सच्चाई
नगर परिषद की कार्यशैली पर अब सवाल उठने लगे हैं।
क्योंकि यहां योजनाएं पहले बनती हैं, जगह बाद में ढूंढी जाती है — और अंत में मूर्ति खुद ही “गायब” हो जाती है।
सुजानपुर की यह “परी कथा” हमें यही सिखाती है कि सरकारी योजनाओं में परियां भी सुरक्षित नहीं हैं।
यहां परियां उड़ती नहीं, बल्कि फाइलों और कमरों में कैद हो जाती हैं।“अब इंतजार इस बात का है कि नगर परिषद कब उस कमरे को भी ‘अस्थायी’ बताकर परी को किसी और सुरक्षित जगह शिफ्ट कर दे

Author: Polkhol News Himachal









