
हिमाचल : मेडिकल कॉलेजों में पदोन्नति रोक और वेतन स्थगन प्रस्ताव पर डॉक्टरों में भारी नाराजगी
पोल खोल न्यूज़ | शिमला
आईजीएमसी शिमला के कंसल्टेंट डॉक्टरों की शीर्ष संस्था सीनियर एकेडमिक मेडिकल डॉक्टर्स एसोसिएशन ने हिमाचल के मेडिकल कॉलेजों में उभर रहे संकट को लेकर जनरल हाउस की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में प्रिंसिपल और चिकित्सा शिक्षा निदेशक (DME) पदों पर सेवानिवृत्त अधिकारियों को सेवा विस्तार देने, नियमित पदोन्नति में देरी और वेतन स्थगन के प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया। क्या है पूरा मामला विस्तार से जानते हैं।
सैमडकॉट का आरोप है कि, अगस्त 2022 के बाद से प्रिंसिपल पद पर कोई नियमित पदोन्नति नहीं हुई है। वहीं, इसके चलते वरिष्ठ संकाय का मनोबल गिर रहा है और ‘क्वाइट क्विटिंग’ जैसी स्थिति बन रही है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति रही तो प्रतिभा पलायन बढ़ेगा और मेडिकल कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रमों की मान्यता पर भी संकट आ सकता है।
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वहीं, सैमडकॉट सदस्य डॉ राहुल गुप्ता ने बताया कि चुनिंदा सेवानिवृत्त अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति 13 दिसंबर 2023 की राजपत्रित अधिसूचना का उल्लंघन है, जिसमें पुनर्नियुक्त कर्मचारियों को डीडीओ शक्तियां देने पर रोक है। पात्र संकाय सदस्यों को पदोन्नति नहीं मिल रही, जबकि पुनर्नियुक्त अधिकारी पेंशन और वेतन दोनों ले रहे हैं, जिससे राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
वेतन स्थगन के प्रस्ताव पर सैमडकॉट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा है कि, सरकारी कर्मचारियों का वेतन उनका अधिकार है, न कि वैकल्पिक खर्च. 20-30 फीसदी वेतन कटौती या स्थगन से हजारों कर्मचारियों पर आर्थिक संकट गहराएगा। जनरल हाउस ने सर्वसम्मति से मांग की है कि सरकार वेतन स्थगन नीति जल्द वापस ले और वरिष्ठता के आधार पर पारदर्शी पदोन्नति प्रक्रिया बहाल की जाए। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भारी असर पड़ेगा।

Author: Polkhol News Himachal








