
दवा उद्योग पर मंडराया गहरा संकट, कच्चे माल की कीमतों में उछाल से बढ़ी मुश्किलें
पोल खोल न्यूज़ | सोलन

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों पर संकट गहराने लगा है। खासकर दवा उद्योग इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और कई इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
स्थिति यह है कि पैरासिटामोल एपीआई की कीमत 250 रुपये से बढ़कर 450 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इससे दवाओं के दाम बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई है, जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ सकता है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए हिमाचल ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन ने इस संबंध में ज्ञापन भेजकर उद्योगों के सामने खड़े संकट की जानकारी दी है।
एसोसिएशन का कहना है कि यदि यही हालात बने रहे तो उद्योगों को मजबूरी में बंद करना पड़ेगा, जिससे न केवल उद्योगों को नुकसान होगा बल्कि हजारों कर्मचारी भी बेरोजगार हो सकते हैं।
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एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने बताया कि कच्चे माल की कीमतों में 200 से 300 प्रतिशत तक की अप्रत्याशित वृद्धि ने उद्योगों के अस्तित्व पर खतरा खड़ा कर दिया है। पिछले 15 दिनों में एपीआई, सॉल्वेंट्स, एक्सिपिएंट्स और पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में भारी उछाल आया है।
एल्यूमिनियम, पीवीसी और कांच की बोतलों की कीमतों में भी तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे उत्पादन लागत और बढ़ गई है।
एसोसिएशन का कहना है कि पैकेजिंग लागत बढ़ने से उत्पादन अनुबंध घाटे का सौदा बन गए हैं। इससे दवाइयों की आपूर्ति प्रभावित होने, सरकारी निविदाओं में चूक और रोजगार पर संकट का खतरा मंडरा रहा है।
साथ ही गैस की कमी के कारण औद्योगिक उत्पादन और घरेलू आपूर्ति दोनों प्रभावित हो रही हैं, जिससे श्रमिकों के पलायन की स्थिति भी पैदा हो सकती है।
एसोसिएशन ने मांग की है कि प्रमुख एपीआई, सॉल्वेंट्स, एक्सिपिएंट्स और पैकेजिंग सामग्री की कीमतों पर नियंत्रण किया जाए तथा कालाबाजारी पर सख्ती से रोक लगाई जाए, ताकि उद्योगों को राहत मिल सके।

Author: Polkhol News Himachal








